भारतमे आपदाक जोखिम देशक आकार, जलवायु, भूगोल, जनसंख्या घनत्व आ भवनक स्थिति सँ बनैत अछि। खतरा तखन खास हानिकारक होइत अछि जखन लोक, घर, यातायात, बिजली, पानी वा संचार ओकर चपेटमे आबि जाए आ तैयारी कमजोर हो। मानसूनक बरखा नदीमे बाढ़, शहरमे जल-जमाव, भू-स्खलन, यातायात बाधा आ दूषित पानी पैदा कऽ सकैत अछि। तटीय इलाकामे चक्रवात, समुद्री तूफानी लहर, तेज हवा आ भारी बरखा सेहो आबि सकैत अछि। कतेको क्षेत्रमे, खास कऽ हिमालयक हिस्सा, पूर्वोत्तर आ दोसर भूकंपीय क्षेत्रमे भूकंपक जोखिम महत्वपूर्ण अछि। भूकंपक सही भविष्यवाणी नहि कयल जा सकैत अछि, तेँ सुरक्षित निर्माण, फर्नीचर मजबूत करब आ बचावक तरीका अभ्यास करब जरूरी अछि। लू आ सूखा अचानक आपदा सँ अलग ढंगसँ विकसित होइत अछि, मुदा बहुत लोककेँ प्रभावित कऽ सकैत अछि। वृद्ध, बच्चा, बाहर काज करयवला लोक आ भरोसेमंद पानी वा ठंडा जगह नहि रहयवला लोककेँ पहिने सहायता चाही। पहाड़ी क्षेत्रक लोक आ यात्री भू-स्खलन, आकस्मिक बाढ़, हिमस्खलन आ बंद सड़कक सामना कऽ सकैत छथि। आधिकारिक चेतावनीक बाद तटीय आ द्वीपीय समुदायकेँ भीतर वा ऊँच जगह जाए पड़ि सकैत अछि। भारतक आपदा-प्रबंधन प्रणालीमे राष्ट्रीय, राज्य, जिला आ स्थानीय अधिकारी शामिल छथि। National Disaster Management Authority के आम तौर पर NDMA कहल जाइत अछि; राज्य आ जिल्लामे एकर अनुरूप निकाय स्थानीय योजना आ तालमेल करैत अछि। पुलिस, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ्य सेवा, नागरिक प्रशासन, विशेष प्रतिक्रिया बल, सामुदायिक समूह आ स्वयंसेवक सभ भाग लऽ सकैत छथि। जगह आ घटनाक अनुसार आधिकारिक चेतावनी स्थानीय अधिकारी, मोबाइल अलर्ट, प्रसारण, सायरन वा सीधा घोषणासँ आबि सकैत अछि। चेतावनी, पूर्वानुमान आ प्रतिक्रिया व्यवस्था नुकसान घटबैत अछि, मुदा सुरक्षा सुनिश्चित नहि कऽ सकैत अछि। हर घरमे एखनो सरल जरूरी सामान, भरोसेमंद संपर्क, नजदीकक सुरक्षित जगहक जानकारी आ बच्चा, वृद्ध, दिव्यांग लोक तथा जानवर लेल योजना चाही।
भारतमे प्राकृतिक आ अन्य आपदा
भारतमे बाढ़, चक्रवात, भूकंप, भू-स्खलन, लू, सूखा, आग आ दोसर स्थानीय आपातस्थिति आपदाक रूप लऽ सकैत अछि। तट, नदी मैदान, पहाड़, शुष्क क्षेत्र, शहर आ द्वीपमे मुख्य खतरा अलग होइत अछि। तैयार घराना जल्दी प्रतिक्रिया दैत अछि, किएक तँ ओकरा आश्रय, संपर्क आ निकासी योजनाक जानकारी पहिनेसँ रहैत अछि।
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