भारत कई जलवायु आ भू-दृश्य क्षेत्र मे पसरल अछि। बर्फीला पहाड़, उष्णकटिबंधीय जंगल, सुखाड़ झाड़ी, बाढ़भूमि, मैंग्रोव, प्रवाल क्षेत्र आ समुद्री तट, सभ अलग-अलग जीवन रूपकेँ आश्रय दैत अछि। जैवविविधताक अर्थ अछि पौधा, जानवर, कवक आ आन जीव सभक विविधता, संगहि ओ सभ जे पारिस्थितिकी तंत्र बनबैत अछि। भारतमे व्यापक रूप सँ भेटेवला प्रजाति सभक संग सीमित क्षेत्रमे मात्र भेटेवला प्रजाति सेहो अछि, खास कऽ पश्चिमी घाट, हिमालय आ द्वीपीय पारिस्थितिकी जेकाँ जैविक रूप सँ समृद्ध जगह सभमे। सभ जंगल एक्के जेकाँ नहि होइत अछि। सदाबहार जंगल, पर्णपाती जंगल, कांटेदार जंगल, पहाड़ी जंगल, मैंग्रोव आ समुदाय द्वारा इस्तेमाल कएल जाएवला वनभूमि, अलग-अलग आवास आ लाभ दैत अछि। घासभूमि, मरुभूमि, आर्द्रभूमि आ झाड़ीभूमि खाली जमीन नहि, महत्वपूर्ण प्राकृतिक तंत्र अछि। ई विशेष वन्यजीव, चराइ, भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण आ जानवर सभक मौसमी आवागमनकेँ सहारा दैत अछि। नदी आ आर्द्रभूमि दूर-दूरक भू-दृश्यकेँ जोड़ैत अछि। ओ पानी आ गाद बहबैत अछि, माछ आ चिड़ैकेँ सहारा दैत अछि, भूजल फेर भरैत अछि आ खेती तथा बस्ती टिकबैत अछि; मुदा बांध, दोहन, प्रदूषण, आक्रामक प्रजाति आ क्षतिग्रस्त तट ई काम बदलि सकैत अछि। पीढ़ी दर पीढ़ी भारतक लोक प्रकृतिक रूप देलनि आ ओकर रक्षा सेहो कयलनि। पवित्र उपवन, सामुदायिक जंगल, चरवाहा मार्ग, गांवक पोखरि आ पारंपरिक खेती-दृश्य, सांस्कृतिक अभ्यास आ आजीविका के सहारा दैत, आवास सुरक्षित रखि सकैत अछि। राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण रिजर्व, सामुदायिक रिजर्व, वन प्रबंधन आ स्थानीय संरक्षण, सुरक्षा देबाक अलग-अलग तरीका अछि। प्रवेश आ अनुमत गतिविधि जगह अनुसार बदलैत अछि, ताहि लेल पट्टिका आ जिम्मेदार प्राधिकरणक निर्देश मानू। मुख्य दबाव मे आवास नष्ट होनाइ, वन्यजीव मार्ग टूटनाइ, प्रदूषण, अति-दोहन, आक्रामक प्रजाति, आगि आ जलवायु परिवर्तन शामिल अछि। जखन लोक, पशु आ वन्यजीवकेँ एक्के जमीन वा पानी चाही, तखन संघर्ष भऽ सकैत अछि। जखन आवास आपस मे जुड़ल रहैत अछि आ नजदीकक लोक निर्णय आ लाभ मे हिस्सा लैत छथि, तखन प्रकृति संरक्षण बेसी प्रभावी होइत अछि। पुनर्स्थापन, जिम्मेदार पर्यटन, सावधानीपूर्वक खेती आ स्थानीय जल व्यवस्था के सुरक्षा मदद कऽ सकैत अछि, मुदा एकरा लेल दीर्घकालीन देखभाल आ यथार्थ स्थानीय ज्ञान जरूरी अछि।
भारतमे प्रकृति
भारतक प्रकृति मे हिमालयी आवास, जंगल, घासभूमि, मरुभूमि, आर्द्रभूमि, नदी, तट, द्वीप आ खेतीक भूमि शामिल अछि। ई ठाम अद्भुत जैवविविधता के आश्रय दैत अछि आ पानी, भोजन, छाया, माटि-सुरक्षा आ आजीविका प्रदान करैत अछि। भारतमे प्रकृति संरक्षणक अर्थ स्थानीय पारिस्थितिकी संग रहनिहार आ ओहि पर निर्भर समुदाय सभक सम्मान करब सेहो अछि।
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