इरिट्रिया के अतीत को एक सरल, निरंतर राष्ट्रीय कथा के रूप में नहीं समझा जा सकता। साक्ष्य और राजनीतिक नियंत्रण मासावा और असाब के आसपास के लाल सागर तट, अस्मारा के आसपास की केंद्रीय उच्चभूमि, कोहाइतो के आसपास की दक्षिणी उच्चभूमि और पश्चिमी निम्नभूमि में अलग-अलग थे। पुरातात्त्विक साक्ष्य बताते हैं कि आज के इरिट्रिया के कुछ हिस्सों में लगभग ईसा-पूर्व सातवीं या आठवीं सहस्राब्दी तक बस्तियाँ थीं, हालांकि साक्ष्य असमान हैं। कोहाइतो लगभग ईसा-पूर्व 700 से विकसित हुआ एक शहरी, कृषि और व्यापारिक भू-दृश्य था। अदुलिस लाल सागर का बंदरगाह था, जिसका अंतर्देशीय केंद्रों, जिनमें कोहाइतो भी शामिल था, से संबंध था। दोनों व्यापक अक्सुमी सभ्यता का हिस्सा बने। उसका मुख्य क्षेत्र दक्षिणी इरिट्रिया और उत्तरी इथियोपिया में था और उसका प्रभाव ईस्वी चौथी से छठी शताब्दी में सबसे अधिक था। चौथी शताब्दी में अक्सुमी क्षेत्र में ईसाई धर्म पहुँचा। कोहाइतो को लगभग 900 ईस्वी के आसपास धीरे-धीरे छोड़ दिया गया, लेकिन स्थानीय सामाजिक संगठन और अलग-अलग बस्तियों के सटीक संबंध अब भी केवल आंशिक रूप से दर्ज हैं। मध्यकालीन और आरंभिक आधुनिक काल के साक्ष्य खंडित हैं। उच्चभूमि और तटीय राजनीतिक समुदायों ने अलग-अलग समय पर अलग क्षेत्रों पर नियंत्रण किया, जबकि व्यापार नेटवर्क और लाल सागर की शक्ति बार-बार बदली। मासावा पहले उस्मानी नियंत्रण में आया और बाद में मिस्र के प्रशासन के अधीन रहा। इन अवधियों में आज के इरिट्रिया के पूरे भूभाग पर लगातार शासन करने वाली कोई दर्ज सरकार नहीं थी। आधुनिक क्षेत्रीय ढाँचा इतालवी विस्तार के माध्यम से बना। रूबाटिनो की खरीदें 1869 में शुरू हुईं, इटली ने 1882 में असाब पर अधिकार किया और 1885 में इतालवी सैनिकों ने मासावा तथा असाब पर कब्ज़ा कर लिया। इथियोपिया ने 1889 में इतालवी नियंत्रण को मान्यता दी और 1 जनवरी 1890 को इतालवी इरिट्रिया औपचारिक रूप से स्थापित हुआ। 1890 से 1941 के इतालवी शासन में अस्मारा सैन्य चौकी से नियोजित औपनिवेशिक नगर बना। 1893 से 1941 के विस्तार और 1935 में शुरू हुए बड़े निर्माण कार्यक्रम से आधुनिकतावादी वास्तुकला, परिवहन और औद्योगिक बुनियादी ढाँचा बना, लेकिन साथ ही जबरन श्रम व्यवस्थाएँ और कार्यस्थल तथा नस्ल पर आधारित अलगाव भी कायम हुआ। इस विकास में स्थानीय श्रम और सामग्री केंद्रीय थे। 1941 में केरेन की लड़ाई ने इतालवी नियंत्रण समाप्त किया और ब्रिटिश सैन्य प्रशासन की शुरुआत हुई। 1941 से 1952 तक ब्रिटिश प्रशासन में दलों, समाचारपत्रों और सार्वजनिक बहस सहित राजनीतिक गतिविधियों का विस्तार हुआ। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 2 दिसंबर 1950 के प्रस्ताव 390 A(V) ने इरिट्रिया और इथियोपिया के बीच महासंघ स्थापित किया। व्यवस्था में इरिट्रिया के स्वशासन और संस्थाओं, धर्मों तथा भाषाओं की सुरक्षा का वादा था। महासंघ 1952 से 1962 तक चला, लेकिन इरिट्रिया की स्वायत्तता धीरे-धीरे सीमित हुई। इरिट्रिया की विधानसभा भंग कर दी गई और 1962 में इथियोपिया ने इरिट्रिया को एक प्रांत के रूप में मिला लिया। उस समझौते पर कानूनी और राजनीतिक विवाद स्वतंत्रता तक केंद्रीय बना रहा। सशस्त्र प्रतिरोध 1961 में शुरू हुआ। इरिट्रियन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट, जिसे आम तौर पर ईपीएलएफ कहा जाता है, 1970 के दशक के मध्य में प्रतिरोध के भीतर मतभेदों से उभरा और प्रमुख मुक्ति आंदोलन बना। इथियोपियाई राजतंत्र और डर्ग सरकार के विरुद्ध लगभग तीस वर्ष के युद्ध के बाद, ईपीएलएफ मई 1991 में अस्मारा पहुँचा और इरिट्रिया की अंतरिम सरकार बनाई। युद्ध ने बुनियादी ढाँचे को नष्ट किया और राज्यत्व, बलिदान तथा राष्ट्रीय पहचान की बाद की धारणाओं को गहराई से आकार दिया। इरिट्रिया में जनमत-संग्रह के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षक मिशन, जिसे यूएनओवर कहा जाता है, महासभा के प्रस्ताव 47/114 के तहत अधिकृत हुआ। जनमत-संग्रह 23 से 25 अप्रैल 1993 तक हुआ। पंजीकृत मतदाताओं में 98.5 प्रतिशत से अधिक ने भाग लिया और भारी बहुमत ने स्वतंत्रता के पक्ष में मत दिया। इरिट्रिया ने 27 अप्रैल 1993 को स्वतंत्रता घोषित की और 28 मई 1993 को संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुआ। 24 मई को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इरिट्रिया और इथियोपिया के बीच मई 1998 से जून 2000 तक युद्ध हुआ। संयुक्त राष्ट्र और अफ्रीकी एकता संगठन की मध्यस्थता से 18 जून 2000 का शत्रुता समाप्ति समझौता और 12 दिसंबर 2000 का अल्जीयर्स शांति समझौता हुआ। इथियोपिया और इरिट्रिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन, यानी यूएनएमईई, 31 जुलाई 2000 से 31 जुलाई 2008 तक चला। सीमा संबंधी फैसले के अनसुलझे क्रियान्वयन के कारण 18 वर्ष का ऐसा दौर आया जिसे अक्सर ‘न युद्ध, न शांति’ कहा जाता है। 9 जुलाई 2018 की शांति और मित्रता की संयुक्त घोषणा में कहा गया कि युद्ध की स्थिति समाप्त हो गई है और परिवहन, व्यापार तथा कूटनीतिक संबंध फिर शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया। इन प्रतिबद्धताओं का दीर्घकालीन क्रियान्वयन अलग से जाँचना आवश्यक है। ऐतिहासिक व्याख्या विवादित बनी हुई है। एक दृष्टिकोण इरिट्रिया के आत्मनिर्णय और औपनिवेशिक शासन के अलग अनुभव पर जोर देता है; दूसरा इरिट्रिया को साझा अक्सुमी और इथियोपियाई इतिहास के भीतर रखता है। महासंघ को अंतरराष्ट्रीय गारंटी वाले स्वशासन के रूप में भी देखा जा सकता है, या ऐसे समझौते के रूप में जिसकी बाहरी रूपरेखा ने स्थायी संघर्ष पैदा किया। अस्मारा की औपनिवेशिक इमारतें दमनकारी औपनिवेशिक व्यवस्था और बाद में अपनाई गई राष्ट्रीय विरासत, दोनों का प्रतिनिधित्व करती हैं। मुक्ति का इतिहास भी उपनिवेशवाद-विरोध और आत्मनिर्णय की कथा के साथ युद्ध की कठिन स्मृतियाँ समेटे है। पुरातात्त्विक खोजें, औपनिवेशिक अभिलेख, संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज़ और मुक्ति आंदोलन की स्मृतियाँ एक जैसी दृष्टि नहीं देते; इसलिए तारीखों, स्रोतों की उत्पत्ति और परस्पर विरोधी व्याख्याओं को अलग रखना चाहिए। विरासत अनुसंधान के कई दर्ज प्रवेश-बिंदु हैं। अस्मारा को 2017 में मानदंड (ii) और (iv) के तहत यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बनाया गया; संरक्षित क्षेत्र 481 हेक्टेयर और बफर ज़ोन 1,203 हेक्टेयर में फैला है। इसका ऐतिहासिक परिक्षेत्र 2001 से संरक्षित है, जिसमें निर्माण पर रोक भी शामिल है। 2015 की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत उद्घोषणा राष्ट्रीय ढाँचा देती है; संरक्षण और परमिट में अस्मारा हेरिटेज प्रोजेक्ट और लोक निर्माण विकास विभाग शामिल हैं। शिक्षा मंत्रालय ने 2011 में कोहाइतो को यूनेस्को की संभावित सूची में रखा। अदुलिस अनुसंधान के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, लेकिन उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर उसे पूर्ण यूनेस्को विश्व धरोहर दर्जा प्राप्त नहीं है। यूनेस्को, संयुक्त राष्ट्र और कांग्रेस पुस्तकालय के अभिलेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, जबकि स्थानीय अभिलेखागार और पुरातात्त्विक स्थलों तक पहुँच बदल सकती है। विश्वसनीय अनुसंधान लागत और समय-सारिणी उपलब्ध साक्ष्य से स्थापित नहीं हैं।
इरिट्रिया का इतिहास
इरिट्रिया का इतिहास लाल सागर के तट, केंद्रीय उच्चभूमि, दक्षिणी उच्चभूमि और पश्चिमी निम्नभूमि में अलग-अलग विकसित हुआ; इसलिए आज की सीमाएँ किसी एक निरंतर पुराने राज्य का वर्णन नहीं करतीं। पुरातात्त्विक साक्ष्य ईसा-पूर्व सातवीं और आठवीं सहस्राब्दी के आसपास की बस्तियों तक पहुँचते हैं। बाद में कोहाइतो और अदुलिस ने दक्षिणी इरिट्रिया को अक्सुमी सभ्यता और लाल सागर के व्यापार से जोड़ा। 1890 से इतालवी औपनिवेशिक शासन, ब्रिटिश प्रशासन, 1952 में इथियोपिया के साथ महासंघ, 1962 में विलय और मुक्ति संघर्ष ने आधुनिक राज्य को आकार दिया। जनमत-संग्रह के बाद इरिट्रिया ने 1993 में स्वतंत्रता घोषित की; इथियोपिया के साथ 1998–2000 का युद्ध और 2018 की शांति घोषणा उसके हालिया इतिहास के केंद्रीय प्रसंग हैं।
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