किरिबाती का इतिहास ऐसे प्रवाल-द्वीप समुदायों में निहित है जिनका जीवन नौवहन, समुद्र और भूमि के संसाधनों, वंशावली और विशेष द्वीपों से रिश्तों पर निर्भर था। गिल्बर्ट द्वीपों से जुड़ी जनता, भाषा और सांस्कृतिक-ऐतिहासिक संसार के लिए अलग-अलग संदर्भों में I-Kiribati और Tungaru स्थानीय नाम इस्तेमाल होते हैं। kainga शब्द पूर्वजों से जुड़े मातृस्थान, जगह या संबंध को व्यक्त कर सकता है। पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि पूर्वी माइक्रोनेशिया के प्रवाल-द्वीपों में कम से कम लगभग 2,000 वर्ष पहले बसावट हुई थी, लेकिन पहली बसावट की सटीक तारीखें और मार्ग अब भी अनिश्चित हैं। साक्ष्य पॉलिनेशियाई और फिजी या व्यापक मेलानेशियाई संपर्कों की ओर भी संकेत करते हैं, खासकर फीनिक्स और लाइन द्वीपों में, लेकिन किसी एक सरल प्रवासन-कथा की पुष्टि नहीं करते। किरितिमाती और तबुआएरन में लगभग 700 से 500 वर्ष पहले बाद में पॉलिनेशियाई बसावट हुई हो सकती है, हालांकि इस व्याख्या के कुछ हिस्से काल्पनिक ही हैं। मिशनरी गतिविधियों, व्यापार, श्रमिक प्रवासन और साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा ने औपचारिक औपनिवेशिक शासन से पहले स्थानीय सत्ता, भूमि-संबंधों और बुनियादी ढाँचे को बदल दिया। ब्रिटेन ने 1892 में गिल्बर्ट और एलिस द्वीपों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया। 1900 और 1901 में फॉस्फेट मिलने के बाद बनाबा को ब्रिटिश नियंत्रण में लिया गया या उसका विलय किया गया, और 1916 में गिल्बर्ट और एलिस द्वीप उपनिवेश बनाया गया। औपनिवेशिक प्रशासन ने नई पदानुक्रम व्यवस्थाएँ और संस्थाएँ शुरू कीं; मिशनों, श्रम प्रणालियों और भूमि-वंचन ने मौजूदा व्यवस्थाओं को बाधित किया। फॉस्फेट खनन ने बनाबा को बदल दिया। Pacific Phosphate Company ने 1901 में खनन शुरू किया और 1920 में British Phosphate Commissioners ने इसे संभाल लिया। लगभग 80 वर्षों में करीब 22 मिलियन टन निकाला गया, जिससे भूमि और परिदृश्य को भारी नुकसान हुआ। कई बनाबा निवासियों को फिजी के राबी द्वीप पर विस्थापित किया गया। बनाबा पैतृक मातृभूमि बना हुआ है, जबकि राबी निर्वासन, घर और पहचान का स्थान भी है। उनका इतिहास न्याय, संप्रभुता, प्रतिनिधित्व, निवास और संभावित प्रतिपूर्ति से जुड़े प्रश्नों को आज भी प्रभावित करता है। किरिबाती और फिजी से बनाबा समुदाय के संबंधों, जिनमें Rabi Council of Leaders भी शामिल है, को संबंधित संवैधानिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं के संदर्भ में देखना जरूरी है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने कई गिल्बर्ट द्वीपों पर कब्जा किया। अमेरिकी सेना नवंबर 1943 में उतरी और तरावा तथा माकिन की लड़ाइयों में भारी तबाही और जनहानि हुई। फीनिक्स द्वीपों में भी अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य अड्डों तथा युद्धकालीन गतिविधियों के प्रमाण हैं। किरितिमाती पर, जिसे तब आम तौर पर Christmas Island कहा जाता था, ब्रिटेन ने 1957 और 1958 में Operation Grapple परमाणु परीक्षण किए; इसके बाद 1962 में अमेरिका ने Operation Dominic और Brigadoon परीक्षण किए। ये घटनाएँ किरिबाती के इतिहास को वैश्विक परमाणु राजनीति, उपनिवेश-मुक्ति, सैन्य शक्ति, स्वास्थ्य-संबंधी चिंताओं और पर्यावरणीय बदलाव से जोड़ती हैं। रेडियोधर्मी fallout और दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों के दावों को किसी एक विवरण पर निर्भर रहने के बजाय अभिलेखीय, वैज्ञानिक और प्रभावित समुदायों के साक्ष्यों से मिलाकर देखना चाहिए। स्वतंत्रता की ओर संवैधानिक विकास में 1963 की Advisory Council, 1967 की House of Representatives, 1970 की Legislative Council, 1974 के मतदान के बाद एलिस द्वीपों का अलग होना और 1975 में गिल्बर्ट और एलिस द्वीपों का विभाजन शामिल था। 1976 से House of Assembly काम करने लगी और 1977 में आंतरिक स्वशासन मिला। तुवालु 1978 में स्वतंत्र हुआ और किरिबाती उसी दिन अपनाए गए संविधान के तहत 12 जुलाई 1979 को स्वतंत्र हुआ। Maneaba ni Maungatabu किरिबाती की एकसदनीय संसद है और Te Beretitenti राष्ट्रपति पद है। स्वतंत्रता के बाद से राष्ट्रीय संस्थाओं में वेस्टमिंस्टर से ली गई व्यवस्थाओं के साथ स्थानीय निर्णय-प्रक्रियाएँ भी शामिल रही हैं। किरिबाती का ऐतिहासिक साक्ष्य पुरातत्व, मौखिक इतिहास, वंशावलियों, मिशनरी और औपनिवेशिक फाइलों, संग्रहालय की वस्तुओं, सैन्य अभिलेखों, फॉस्फेट-कंपनी अभिलेखों, परमाणु-परीक्षण रिकॉर्ड, संसदीय और संवैधानिक दस्तावेजों तथा समुदायों की स्मृति-परंपराओं से मिलता है। मौखिक इतिहास समुदायों के ज्ञान और अनुभवों को दर्ज करता है, लेकिन हर विवरण को संदर्भ में रखकर दूसरे साक्ष्यों से मिलाना जरूरी है। औपनिवेशिक अभिलेखों में स्थानीय दृष्टिकोण अक्सर कम दिखाई देते हैं, इसलिए जहाँ संभव हो बनाबा, किरिबाती, राबी प्रवासी समुदाय, युद्ध-वयोवृद्ध, परमाणु-परीक्षण प्रभावित समुदाय और पर्यावरण संबंधी विवरण साथ पढ़े जाने चाहिए। Te Umwanibong, जिसे Kiribati National Museum भी कहा जाता है, 1987 से सांस्कृतिक और संग्रहालय संस्था के रूप में काम कर रहा है; उसका संग्रहालय भवन 1991 में खुला। यह कलाकृतियाँ सुरक्षित रखता है, मौखिक इतिहास और पुरातत्व का दस्तावेजीकरण करता है और शिक्षा में सहयोग देता है। Ministry of Culture and Internal Affairs का Culture and Museum Division प्रमुख सार्वजनिक निकाय है। संग्रहालय में प्रवेश निःशुल्क है, जबकि शोध और अभिलेखागार तक पहुँच आम तौर पर विशिष्ट अनुरोध पर निर्भर करती है। मौखिक इतिहास तक पहुँच सामुदायिक संबंधों और संदर्भ पर निर्भर है; शोध की लागत या प्रतीक्षा अवधि एकसमान नहीं होती। किरिबाती 12 मई 2000 को UNESCO World Heritage Convention में शामिल हुआ। उसका एक विश्व धरोहर स्थल, Phoenix Islands Protected Area, 2010 में प्राकृतिक धरोहर के रूप में सूचीबद्ध हुआ। UNESCO की मौजूदा देश-प्रोफ़ाइल में कोई सांस्कृतिक विश्व धरोहर स्थल या अस्थायी सूची प्रविष्टि नहीं है, हालांकि नामांकन सामग्री में पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व दर्ज है। प्राचीन इतिहास या मध्य युग जैसे यूरोपीय काल-विभाजन किरिबाती के साक्ष्यों पर ठीक से लागू नहीं होते; बसावट, औपनिवेशिक शासन, युद्धकालीन इतिहास, परमाणु परीक्षण, उपनिवेश-मुक्ति और स्वतंत्र राष्ट्र बनने की प्रक्रिया अधिक उपयोगी स्थानीय कालखंड हैं।
किरिबाती का इतिहास
किरिबाती का इतिहास गिल्बर्ट, फीनिक्स और लाइन द्वीपों में बसावट, बदलते द्वीपीय समाजों, औपनिवेशिक शासन, युद्ध, परमाणु परीक्षण, उपनिवेश-मुक्ति और स्वतंत्र राष्ट्र बनने की प्रक्रिया का इतिहास है। शुरुआती बसावट की तारीखों और प्रवासन मार्गों पर आंशिक रूप से मतभेद हैं; मौखिक इतिहास, पुरातत्व, वंशावलियाँ और औपनिवेशिक अभिलेख अलग-अलग तरह के साक्ष्य देते हैं। बनाबा, तरावा, किरितिमाती और अन्य द्वीपसमूह स्थानीय इतिहास को फॉस्फेट खनन, सैन्य अभियानों, विस्थापन और वैश्विक घटनाओं से जोड़ते हैं।
VivAVia से गलतियाँ हो सकती हैं। महत्वपूर्ण जानकारी की जाँच करें।

