कैमरून की आधुनिक सीमाएँ किसी एक ऐतिहासिक राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। उत्तर-पश्चिम के ग्रासफ़ील्ड्स क्षेत्र में शुम लाका से मिले पुरातात्विक प्रमाण कम से कम 32,000 वर्ष पहले की मानवीय गतिविधि दिखाते हैं; वहाँ 3,000 से 8,000 वर्ष पुराने 18 मानव कंकाल भी मिले हैं। ये प्रमाण इस इलाके में पाषाण युग से धातु-कर्म तक लंबे संक्रमण का समर्थन करते हैं, लेकिन एक क्षेत्र के निष्कर्षों को पूरे देश पर लागू नहीं करना चाहिए। बंटू भाषाओं की उत्पत्ति और प्रवास के सिद्धांत क्षेत्रीय प्रक्रियाएँ बताते हैं; वे कैमरून की आबादी के इतिहास की कोई एक सरल व्याख्या नहीं देते। औपनिवेशिक शासन से पहले उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्र साहेल तथा चाड झील के मार्गों से जुड़े थे। बदलते सत्ता-रूपों के तहत कानेम-बोर्नू का प्रभाव, अदामावा के अमीरात और लामिदात तथा ग्रासफ़ील्ड्स के मुखियातंत्र और राज्य विकसित हुए। लामिदात वह क्षेत्र है जिस पर लामिदो शासन करता है; शेफ़री पारंपरिक प्राधिकारी के नेतृत्व वाला मुखियातंत्र है। सुल्तान न्जोया से जुड़ी दरबारी परंपराओं और लिपि के कारण बामुम राज्य का इतिहास विशेष रूप से अच्छी तरह दर्ज है। तट और आंतरिक इलाके के व्यापार ने अलग-अलग समुदायों को जोड़ा, लेकिन राजनीतिक सीमाएँ और निर्भरताएँ समय के साथ बदलती रहीं। पुरातत्व, मौखिक इतिहास और दरबारी अभिलेख असमान रूप से बचे हैं; इसलिए इतिहासकार एक परंपरा को पूर्ण माने बिना स्रोतों की तुलना करते हैं। 1472 में फर्नांडो पो और वूरी मुहाने से पुर्तगाली संपर्क ने Rio dos Camaroes नाम को जन्म दिया, जो बाद में Cameroun बना। यूरोपीय व्यापार, ईसाई मिशन और अटलांटिक दास व्यापार ने स्थानीय समाजों को अलग-अलग तरह से प्रभावित किया। स्थानीय शासकों और राज्यों ने अलग-अलग मात्रा में सत्ता बनाए रखी और बाहरी व्यापारियों तथा मिशनरियों से अलग-अलग तरीकों से बातचीत की। जर्मनी ने 1884 में संरक्षित क्षेत्र स्थापित किया और 1885 में उपनिवेश बनाया। औपनिवेशिक शासन ने बागान, रेलवे, बंदरगाह, स्कूल और अस्पताल बढ़ाए, लेकिन जबरन श्रम और शारीरिक दंड भी लागू किए। प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार के बाद ब्रिटेन और फ्रांस ने क्षेत्र पर कब्ज़ा किया। 1919 और 1922 में राष्ट्र संघ ने लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र फ्रांस और लगभग 20 प्रतिशत यूनाइटेड किंगडम को अधिदेश के रूप में सौंपा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1946 में ये क्षेत्र संयुक्त राष्ट्र के न्यास-क्षेत्र बने। फ्रांसीसी कैमरून में आत्मसातीकरण की नीति अधिक मजबूत थी, जबकि ब्रिटिश कैमरून में अप्रत्यक्ष शासन के रूप अपनाए गए। इन व्यवस्थाओं ने प्रशासन, कानून और शिक्षा के अनुभव अलग-अलग बना दिए। फ्रांसीसी कैमरून ने 16 अप्रैल 1957 को स्वायत्तता प्राप्त की और 1 जनवरी 1960 को स्वतंत्र कैमरून गणराज्य बना। Union des Populations du Cameroun, जिसे आम तौर पर UPC कहा जाता है, ने स्वतंत्रता और पुनःएकीकरण की माँग की और सशस्त्र संघर्ष तथा दमन में शामिल हुआ। संघर्ष के विवरण उसकी वैधता, जिम्मेदारी और हिंसा के पैमाने को लेकर अलग-अलग हैं। 11 फरवरी 1961 को संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में हुए जनमत-संग्रह के परिणाम अलग थे: उत्तरी ब्रिटिश कैमरून नाइजीरिया में शामिल हुआ, जबकि दक्षिणी ब्रिटिश कैमरून कैमरून में शामिल हुआ। 1 अक्टूबर 1961 को फूम्बान वार्ता के बाद संघीय कैमरून गणराज्य ने पूर्वी और पश्चिमी कैमरून को एक साथ जोड़ा। 20 मई 1972 के जनमत-संग्रह ने संघीय व्यवस्था की जगह एकात्मक राज्य—संयुक्त कैमरून गणराज्य—लाया। 1984 में देश का नाम फिर कैमरून गणराज्य हुआ। स्वतंत्रता-पश्चात इतिहास में केंद्रीकरण, एक-दलीय शासन, 1990 में बहुदलीय व्यवस्था की वापसी, 1972 के संविधान में 1996 का संशोधन और 2008 का एक और संशोधन शामिल हैं। संवैधानिक व्यवहार, भाषाई और क्षेत्रीय विविधता तथा आर्थिक और तेल-संबंधी संकट देश के ऐतिहासिक विकास का हिस्सा हैं। क्षेत्रीय इतिहास में बाकासी विवाद भी शामिल है। 10 अक्टूबर 2002 के अपने फैसले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने बाकासी पर संप्रभुता कैमरून को दी और चाड झील से समुद्र तक की सीमा पर निर्णय किया। 2008 के हस्तांतरण समझौते ने इस बदलाव को आगे बढ़ाया। यह ऐतिहासिक सीमा-संदर्भ है, राज्य प्रशासन का अलग विवरण नहीं। समकालीन इतिहास में लगभग 2013 से सुदूर उत्तर में बोको हराम का खतरा शामिल है। उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम में अंग्रेज़ी भाषा की स्थिति, कॉमन लॉ व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर वकीलों तथा शिक्षकों के विरोध 2016 में शुरू हुए। 2017 में अलगाववादी संघर्ष बढ़ा, जिससे सशस्त्र टकराव, विस्थापन और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप पैदा हुए। सरकार और गैर-राज्य पक्षों के विवरण अलग पहचानने चाहिए; मृतकों और विस्थापितों की संख्या के साथ तारीख और स्पष्ट स्रोत जरूरी हैं। कैमरून में शोध के लिए कला और संस्कृति मंत्रालय के अधीन Archives nationales du Cameroun, विश्वविद्यालय, पुरातात्विक स्थल, विरासत सूची, स्थानीय समुदाय और पारंपरिक प्राधिकारी उपयोगी हैं। मौखिक और अनुष्ठानिक परंपरा ऐतिहासिक स्रोत हैं, लेकिन उनसे कोई तारीख अपने-आप सटीक रूप से प्रमाणित नहीं होती। Law No. 2000/010 सार्वजनिक और निजी अभिलेखों, सामूहिक स्मृति के संरक्षण, मूल्यांकन तथा नष्ट करने के नियमों को संबोधित करता है। पहुँच संग्रह, संस्था या समुदाय पर निर्भर करती है; सार्वजनिक और निजी अभिलेखों के नियम अलग हो सकते हैं और संरक्षण या सहमति की शर्तें लागू हो सकती हैं। पूरे देश के लिए कोई एक इतिहास सेवा, शुल्क या समय-सीमा नहीं है। अभिलेखीय अध्ययन, विश्वविद्यालय शोध, पुरातात्विक क्षेत्रकार्य, विरासत दस्तावेज़ीकरण और मौखिक-इतिहास साक्षात्कार—सभी के लिए पहुँच और खर्च की अलग व्यवस्थाएँ हैं।
कैमरून का इतिहास
कैमरून का इतिहास प्रागैतिहासिक काल से आज तक मानव गतिविधि, राजनीतिक बदलाव, आर्थिक आदान-प्रदान और सामाजिक जीवन को समेटता है। इस क्षेत्र में कई पुराने राज्य, मुखियातंत्र, अमीरात और व्यापारिक नेटवर्क थे; यह एक निरंतर एकीकृत राज्य नहीं था। औपनिवेशिक शासन, फ्रांसीसी कैमरून और ब्रिटिश कैमरून का विभाजन, स्वतंत्रता, पुनःएकीकरण और मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष देश के इतिहास को गहराई से आकार देते हैं।
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