कोमोरोस द्वीपसमूह पूर्वी अफ्रीकी तट और मेडागास्कर के बीच स्थित है। लगभग आठवीं शताब्दी से दर्ज पुरातात्त्विक स्थल यहाँ स्थापित गतिविधि दिखाते हैं; इससे पहले भी लोग रहे हों, यह संभव है, लेकिन इसका निर्णायक प्रमाण नहीं मिला है। मिट्टी के बर्तन और फसलें अफ्रीकी, मालागासी या प्रोटो-मालागासी और ऑस्ट्रोनेशियाई आबादियों से संपर्क का संकेत देती हैं, हालांकि आगमन का क्रम स्पष्ट नहीं है। शुरुआती काल के लिए कोई सतत स्वदेशी लिखित इतिहास प्रमाणित नहीं हुआ है। नौवीं शताब्दी में अफ्रीकी तट, मेडागास्कर, अरब प्रायद्वीप, खाड़ी क्षेत्र, लाल सागर और भारत के साथ समुद्री व्यापार के दौरान इस्लामीकरण संभवतः फैला। ग्यारहवीं शताब्दी से फ़ारसी या शिराज़ी और अरब अभिजात वर्ग ने तटीय व्यापार केंद्र स्थापित किए या उन्हें प्रभावित किया और स्थानीय अफ्रीकी तथा मालागासी समुदायों के साथ घुलमिल गए। कम-से-कम ग्यारहवीं शताब्दी तक शहरी केंद्र विकसित हो चुके थे। चौदहवीं और पंद्रहवीं शताब्दी के आसपास नगर-राज्य और सल्तनतें प्रमुख हुईं। राजनीतिक सत्ता बँटी रही; द्वीपों के बीच प्रतिस्पर्धा और अस्थायी गठबंधन होते रहे। पारंपरिक कोमोरियाई समाज में मातृवंशीय और मातृस्थानीय रीति-रिवाज, आयु-समूह और पितृवंशीय इस्लामी परंपराएँ साथ मौजूद थीं। द्वीप हिंद महासागर के दास व्यापार में भी शामिल थे। मालागासी छापों में लोगों को पकड़कर ले जाया जाता था और दासों के निवास क्षेत्र आम तौर पर पुराने मदीनों के बाहर होते थे। किलेबंद संरचनाएँ छापों के खतरे को दर्शाती हैं। छह ऐतिहासिक मदीनों में शहरी और राजनीतिक विकास के प्रमाण सुरक्षित हैं; यूनेस्को ने 2026 में मानदंड (iii) और (iv) के तहत इन्हें विश्व धरोहर सूची में शामिल किया। औपनिवेशिक शासन ने द्वीपसमूह के राजनीतिक इतिहास को अलग-अलग रास्तों में बाँट दिया। मायोट 1841 में फ्रांस को सौंपा गया, 1843 में आधिकारिक फ्रांसीसी उपनिवेश बना और वहाँ 1846 में दासता समाप्त की गई। फ्रांस ने 1886, 1887 और 1892 में क्रमशः ग्रांद कोमोर, अंजुआँ और मोहेली पर संरक्षित राज्य स्थापित किए। 1912 में ये द्वीप उपनिवेश बने और 1946 तक मेडागास्कर से जुड़े रहे। 1946 में द्वीपसमूह फ्रांसीसी विदेशी क्षेत्र बना और द्ज़ाउद्ज़ी उसका प्रशासनिक केंद्र था। 22 दिसंबर 1974 के जनमत-संग्रह में स्वतंत्रता के पक्ष में 154,184 और विरोध में 8,853 मत दर्ज हुए; कुल परिणाम 94.56 प्रतिशत स्वतंत्रता के पक्ष में था। बाद के विवरणों में इस परिणाम की द्वीपवार व्याख्या पर मतभेद हैं। कोमोरियाई स्वतंत्रता की घोषणा 6 जुलाई 1975 को हुई, जबकि मायोट फ्रांसीसी प्रशासन में रहा। कोमोरोस संघ और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव कोमोरियाई संप्रभुता के दावे की पुष्टि करते हैं, जबकि फ्रांस मायोट का प्रशासन करता है। इन स्थितियों को संबंधित पक्षों के दावे के रूप में बताना चाहिए, निर्विवाद तथ्य के रूप में नहीं। स्वतंत्रता के बाद 1975 से 2000 के बीच बीस से अधिक तख्तापलट या तख्तापलट के प्रयास हुए; 1978 में संघीय इस्लामी गणराज्य बना, 1989 में अहमद अब्दल्लाह की हत्या हुई और 1997 में अंजुआँ तथा मोहेली में अलगाव के संकट आए। 17 फरवरी 2001 का फोंबोनी समझौता और दिसंबर 2001 का जनमत-संग्रह 2002 में कोमोरोस संघ की स्थापना से पहले हुए। इस व्यवस्था में द्वीपों को स्वायत्तता और राष्ट्रपति पद के आवर्तन का ढाँचा मिला। अंजुआँ का 2007–2008 का संकट पुनर्एकीकरण के साथ समाप्त हुआ। 2018 के संवैधानिक जनमत-संग्रह ने राष्ट्रपति पद के आवर्तन की व्यवस्था बदली और इसके बाद अंजुआँ में अशांति हुई। अनुसंधान में पुरातत्त्व, औपनिवेशिक संधियाँ और प्रशासनिक अभिलेख, संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज़, यूनेस्को के नामांकन और मूल्यांकन अभिलेख, CNDRS और DGAC की सूचियाँ, अकादमिक अध्ययन तथा मौखिक या सामुदायिक स्मृति का उपयोग होता है। CNDRS का पूरा नाम Centre national de documentation et de recherche scientifique है। Commission nationale comorienne pour l’UNESCO भी विरासत से जुड़े दस्तावेज़ीकरण में योगदान देता है। यूनेस्को के अनुसार, शोध और पुरातात्त्विक आँकड़े सीमित हैं; इसलिए शिराज़ी मूल, शुरुआती कालक्रम और मायोट की कानूनी स्थिति से जुड़े दावों का स्रोत स्पष्ट बताना आवश्यक है। संयुक्त राष्ट्र और यूनेस्को के सार्वजनिक दस्तावेज़ आम तौर पर उपलब्ध हैं, जबकि CNDRS, DGAC, अभिलेखागार और स्थलों तक पहुँच अनुमति और परियोजना की शर्तों पर निर्भर करती है। उपलब्ध शोध में कोई मानक राष्ट्रीय शुल्क या समय-सीमा स्थापित नहीं है।
कोमोरोस का इतिहास
कोमोरोस का इतिहास बसावट, हिंद महासागर के आदान-प्रदान, इस्लामीकरण, सल्तनतों, औपनिवेशिक शासन, स्वतंत्रता और मायोट को लेकर जारी विवादों का सिलसिला है। पुरातत्त्व, लिखित अभिलेख, मौखिक स्मृति और विरासत अनुसंधान साक्ष्य देते हैं, लेकिन शुरुआती बसावट और बाद की कुछ व्याख्याएँ अब भी विवादित हैं। द्वीपों का इतिहास अफ्रीकी, मालागासी, अरब, फ़ारसी और दक्षिण एशियाई नेटवर्क से जुड़ा है।
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