सबसे पुराने साक्ष्यों में सहेलैंथ्रोपस त्चाडेन्सिस शामिल है, जिसे तूमाई भी कहा जाता है। यह जुराब और तोरोस-मेनेल्ला क्षेत्र में मिला और इसकी आयु लगभग 6–7 मिलियन वर्ष आँकी गई है। मानव विकास में इसका सटीक स्थान अब भी विवादित है, जबकि 2022 में मिले जीवाश्म साक्ष्य पेड़ों के उपयोग के साथ नियमित रूप से सीधे चलने की संभावना दिखाते हैं। एनेदी और तिबेस्ती क्षेत्रों में होलोसीन जलवायु बदलावों ने बसावट, पशुपालन, आवाजाही और शैलचित्रों को आकार दिया। एनेदी का अधिक आर्द्र काल लगभग 11,700 से 4,300 वर्ष पहले तक रहा; वहाँ पुरातात्त्विक निशान और शैलचित्र लगभग 7,000 वर्ष पुराने हैं। चाड झील बेसिन में कम से कम पाँचवीं शताब्दी ईसा-पूर्व के उत्तरार्ध तक मानव बसावट के साक्ष्य मिलते हैं। पुरातत्त्व, अरबी यात्रावृत्तांत और मौखिक स्रोत साओ समाजों, उनकी बस्तियों और टेराकोटा अवशेषों का उल्लेख करते हैं। ये स्रोत अपने-आप प्राचीन समाजों और आधुनिक राज्य के बीच सीधी निरंतरता साबित नहीं करते। मध्यकाल में कानेम चाड झील और सहारा-पार मार्गों के आसपास विकसित हुआ। सैफावा राजवंश ने राजनीतिक विस्तार, ग्यारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक इस्लामीकरण और तेरहवीं शताब्दी में साम्राज्य के विकास को बढ़ावा दिया। चौदहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में आए संकट के बाद राजनीतिक केंद्र बोर्नू की ओर चला गया। इससे वह ऐतिहासिक परिदृश्य बना जिसे सामान्यतः कानेम-बोर्नू कहा जाता है। इसके नेटवर्क व्यापार, घुड़सवार सेना, इस्लामी विद्वत्ता और दास व्यापार को उन क्षेत्रों में जोड़ते थे जो अब कई देशों में आते हैं। बागिरमी, जिसे बागिरमी भी लिखा जाता है, सोलहवीं शताब्दी में सल्तनत के रूप में उभरा और 1568 से 1598 के बीच इसका इस्लामीकरण हुआ। वादाई, जिसे वदाई भी लिखा जाता है, सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दियों में इस्लामी सल्तनत के रूप में विकसित हुआ, दारफुर से संबंध बनाए रखे और अठारहवीं तथा उन्नीसवीं शताब्दियों में एनेदी से गुजरने वाले व्यापार मार्गों पर फैला। आरंभिक आधुनिक काल में सहारा-पार नमक, पशुधन और दास बनाए गए लोगों का व्यापार हुआ; राजनीतिक केंद्र और विद्वानों के नेटवर्क चाड की वर्तमान सीमाओं से आगे तक पहुँचे। रबीह फ़दलल्लाह, जिन्हें राबा भी कहा जाता है, ने व्यापक बागिरमी और मासेन्या क्षेत्रीय संदर्भ में 1893 में बोर्नू पर विजय पाई। फ्रांसीसी सैन्य विस्तार 1891 में शुरू हुआ और विजय तथा नियंत्रण स्थापित करने की प्रक्रिया लगभग 1911 तक जारी रही। फ्रांस ने 1910 में इस क्षेत्र को फ्रांसीसी विषुवतीय अफ्रीका में शामिल किया और 1920 में इसकी औपनिवेशिक स्थिति स्थापित की। उत्तरी और मध्य क्षेत्रों का शासन छोटी सैन्य चौकियों और सल्तनतों को शामिल करने वाले अप्रत्यक्ष शासन से चलता था। दक्षिण में अधिक प्रत्यक्ष प्रशासन, स्कूल, सड़कें, मिशनरी प्रभाव और 1929 से बढ़ता कपास उत्पादन था। 1956 के Loi-Cadre ने सीमित स्वशासन शुरू किया; चाड 1958 में फ्रांसीसी समुदाय का स्वायत्त सदस्य बना और 11 अगस्त 1960 को स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता के बाद फ्रांस्वा तोम्बाल्बाये और चाडियन प्रोग्रेसिव पार्टी, जिसे PPT कहा जाता था, ने बढ़ते हुए सत्तावादी शासन की स्थापना की। 1962 में पार्टी एकमात्र वैध पार्टी बनी। क्षेत्रीय और धार्मिक असमानताओं ने 1965 में कर-विरोध और उत्तरी तथा मध्य क्षेत्रों में सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा दिया। 1975 के सैन्य तख्तापलट से फ़ेलिक्स मालूम सत्ता में आए। 1979 से 1982 तक एन'जमेना में लड़ाई, राष्ट्रीय एकता और संक्रमण की सरकार, लीबिया का हस्तक्षेप और औज़ू पट्टी को लेकर संघर्ष ने अगला दौर तय किया। हुसैन हाब्रे ने 1982 से 1990 तक शासन किया। 1994 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने औज़ू पट्टी पर चाड की संप्रभुता की पुष्टि की। हाब्रे शासन में राजनीतिक हत्याएँ, यातना, यौन हिंसा और जबरन गुमशुदगियाँ हुईं। 2015 में चाड की एक अदालत ने दस्तावेज़ीकरण और सुरक्षा निदेशालय के 20 एजेंटों को दोषी ठहराया। असाधारण अफ्रीकी न्यायालयों ने 30 मई 2016 को हाब्रे को मानवता के विरुद्ध अपराधों, युद्ध अपराधों और यातना का दोषी ठहराया; 2017 में अपील पर सज़ा की पुष्टि हुई। क्षतिपूर्ति, स्मारक-कार्य और संबंधित न्यास-निधि की प्रक्रिया अधूरी रही है, जबकि राज्य, पीड़ित, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विवरणों में अब भी मतभेद हैं। इद्रिस देबी इत्नो ने 2 दिसंबर 1990 को सत्ता संभाली। 1991 का राष्ट्रीय चार्टर, 1993 का संप्रभु राष्ट्रीय सम्मेलन, 1996 का संवैधानिक जनमत-संग्रह और बाद के चुनावों ने बहुलतावादी संस्थाएँ बनाईं, साथ ही राष्ट्रपति का प्रभुत्व मजबूत रहा। दोबा तेल परियोजना ने 2003 में उत्पादन शुरू किया और तेल कैमरून से होकर गुजरने वाली लगभग 1,000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से भेजा गया; राजस्व 2004 में शुरू हुआ। राजस्व नियमों पर विवाद के कारण 2008 में विश्व बैंक का समर्थन निलंबित हुआ। सूडान से संबंध, दारफुर संघर्ष और 2002 से 2010 के बीच सशस्त्र समूहों के समझौतों ने चाड के राजनीतिक इतिहास को उसकी सीमा से लगे क्षेत्र से जोड़ा। 20 अप्रैल 2021 को सैन्य अभियान के दौरान इद्रिस देबी की मृत्यु के बाद संक्रमणकालीन सैन्य परिषद, Conseil militaire de transition या CMT, का नेतृत्व महामत इद्रिस देबी इत्नो ने किया। 8 अगस्त 2022 के दोहा शांति समझौते में 43 राजनीतिक और सैन्य समूह शामिल हुए। Dialogue national inclusif et souverain tchadien, जिसे DNIS कहा जाता है, अगस्त से अक्टूबर 2022 तक हुआ। 17 दिसंबर 2023 को हुए संवैधानिक जनमत-संग्रह को 86 प्रतिशत मतों से मंज़ूरी मिली, हालांकि विपक्षी समूहों ने नतीजे पर विवाद किया। संवैधानिक परिषद ने 6 मई 2024 को महामत इद्रिस देबी इत्नो की राष्ट्रपति चुनाव में 61 प्रतिशत मतों से जीत की पुष्टि की; उन्होंने 23 मई 2024 को शपथ ली। विधायी, प्रांतीय और नगरपालिका चुनाव 29 दिसंबर 2024 को हुए। संयुक्त राष्ट्र ने 25 फरवरी 2025 के सीनेट चुनाव को संक्रमण का अंतिम चरण बताया। समावेशन, विपक्षी बहिष्कार और चुनाव की विश्वसनीयता पर बहस जारी रही। संस्कृति और विविधता संवर्धन मंत्रालय, चाड का यूनेस्को राष्ट्रीय आयोग, Musée national tchadien, एन'जमेना विश्वविद्यालय, Centre national d’appui à la recherche, स्थानीय समुदाय और पारंपरिक संस्थाएँ इतिहास को संरक्षित करने या उसकी व्याख्या करने में योगदान देते हैं। 1960 का कानून 14-60 प्रागैतिहासिक, पुरातात्त्विक, वैज्ञानिक और कलात्मक स्थलों तथा वस्तुओं की रक्षा करता है; 1962 के डिक्री संख्या 180 ने राष्ट्रीय संग्रहालय स्थापित किया। पुरातात्त्विक शोध और खुदाई के लिए लागू कानूनों और परमिटों का पालन आवश्यक है। एनेदी में पारंपरिक उपयोग की अनुमति है, जबकि खनन खोज, शिकार और वनों की कटाई संरक्षित विरासत व्यवस्था से बाहर हैं। संग्रहालयों और स्थलों तक पहुँच क्षेत्र और सुरक्षा तथा यात्रा परिस्थितियों पर निर्भर करती है; चाड में देशव्यापी एक समान प्रवेश शुल्क या शोध समय-सारणी नहीं है। ऐतिहासिक दावों के लिए स्रोतों की सावधानीपूर्वक तुलना आवश्यक है। गहरे प्रागैतिहासिक काल के लिए जीवाश्म और भूस्तर-विज्ञान सबसे मजबूत आधार हैं; इसके बाद शैलचित्र और पुरातत्त्व, अरबी इतिहास-वृत्त और यात्रावृत्तांत, मौखिक इतिहास, औपनिवेशिक अभिलेख, अदालती अभिलेख और संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज़ आते हैं। मौखिक इतिहास स्मृति और स्थानीय व्याख्या को सुरक्षित रखता है, लेकिन इसकी तुलना अन्य साक्ष्यों से करनी चाहिए। कानेम-बोर्नू, बागिरमी या वादाई जैसी पुरानी राजनीतिक व्यवस्थाओं पर आधुनिक सीमाएँ पीछे से लागू नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उनके क्षेत्र और नेटवर्क आज के कई राज्यों में फैले थे।
चाड में इतिहास
चाड का इतिहास मानव विकास के आरंभिक चरणों, चाड झील के आसपास के प्राचीन समाजों, मध्यकालीन इस्लामी राज्यों, औपनिवेशिक शासन, स्वतंत्रता, गृहयुद्धों, तेल उत्पादन और हालिया राजनीतिक बदलाव से जुड़ा है। इसकी ऐतिहासिक सीमाएँ आज की सीमाओं से आगे चाड झील बेसिन, सहारा और कानेम-बोर्नू, बागिरमी तथा वादाई को जोड़ने वाले व्यापार मार्गों तक फैली थीं। पुरातत्त्व, जीवाश्म, शैलचित्र, लिखित अभिलेख, मौखिक इतिहास, अदालती दस्तावेज़ और अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ अलग-अलग प्रकार के साक्ष्य देते हैं।
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