सबसे पुराने विश्वसनीय रूप से दिनांकित बस्ती के प्रमाण टोंगाटापू के नुकुलेका से मिलते हैं, जहाँ लापिता समुदाय लगभग 900–850 ईसा पूर्व में रहते थे। टोंगा में लापिता के 30 से अधिक स्थल ज्ञात हैं। उनकी समुद्री यात्राओं के संपर्कों ने टोंगा को अन्य प्रशांत द्वीपों से जोड़ा, हालाँकि आवाजाही का सटीक मार्ग विवादित है: कुछ व्याख्याएँ द्वीपीय मेलानेशिया से सीधे संपर्क का संकेत देती हैं, जबकि अन्य फिजी के रास्ते आवाजाही का प्रस्ताव करती हैं। बाद में बस्तियाँ टोंगाटापू से हाआपाई, वावाउ, नियुआ और ʻएउआ समेत अन्य द्वीप-समूहों तक फैल गईं। पुरातात्त्विक साक्ष्य लगभग पाँचवीं शताब्दी ईस्वी से सामाजिक भेद दिखाते हैं। बारहवीं शताब्दी के आसपास हेकेता उच्च मुखियाई सत्ता का शुरुआती केंद्र बना। टोंगा के पारंपरिक राज्य-वृत्तांत लगभग 950 ईस्वी से शुरू होने वाले 39 तुई टोंगा शासकों का वर्णन करते हैं। मुआ और लापाहा राजनीतिक और पवित्र केंद्र बने, जहाँ लांगी, किलेबंद स्थल और मौनू-जेटी थे। लगभग बारहवीं से सोलहवीं शताब्दियों तक टोंगा ने विनिमय, बसावट और कर-भेंट वाले समुद्री नेटवर्क बनाए रखे। “तुई टोंगा साम्राज्य” एक उपयोगी संक्षिप्त नाम है, लेकिन साक्ष्य किसी एक समान रूप से केंद्रीकृत और स्थायी साम्राज्य को सिद्ध नहीं करते; मुखियाई नेटवर्क और समुद्री प्रभाव का वर्णन अधिक सावधान है। तुई हाअताकालाउआ लगभग पंद्रहवीं शताब्दी में उभरे और बाद में तुई कानोकुपोलु का प्रभाव बढ़ा। यूरोपीय संपर्क 1616 में विलेम स्काउटन और याकूब ले मेयर से शुरू हुआ, फिर 1643 में एबेल तस्मान और 1773 तथा 1777 में जेम्स कुक आए। कुक ने द्वीपों को “मैत्रीपूर्ण द्वीप” कहा। संपर्क छिटपुट रहा और टोंगा को तत्काल अपने अधीन नहीं किया गया। लंदन मिशनरी सोसाइटी का 1797 का प्रयास विफल रहा, जबकि वेस्लेयन मिशनों ने 1822 में स्थायी प्रयास शुरू किया और 1826 में फिर शुरू किया। तौफाआहाउ ने 1830–31 में धर्मांतरण किया और स्थानीय प्रमुखों तथा शिक्षकों की भागीदारी से ईसाईकरण आगे बढ़ा। गृहयुद्धों और राजनीतिक एकीकरण के परिणामस्वरूप 1845 में सियाओसी टुपोउ प्रथम, जिन्हें जॉर्ज टुपोउ प्रथम भी कहा जाता है, के अधीन टोंगा एकीकृत हुआ और आज तक कायम राजवंश स्थापित हुआ। 1862 की कानून-संहिता ने आम लोगों को प्रभावित करने वाले जबरन श्रम और निर्भरता के रूपों को समाप्त किया तथा भूमि की नई व्यवस्था शुरू की। टोंगा ने 1875 में लिखित संविधान अपनाया और उसी वर्ष 16 सितंबर को पहली संसद खुली। यूनाइटेड किंगडम ने 1879 में टोंगा को औपचारिक रूप से मान्यता दी। 18 मई 1900 की मैत्री और संरक्षकता संधि ने टोंगा को औपचारिक रूप से स्वायत्त रखा, लेकिन उसके विदेश संबंध ब्रिटिश नियंत्रण में रखे और घरेलू मामलों में बाद के ब्रिटिश प्रभाव को संभव बनाया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान टोंगाटापू मित्र राष्ट्रों का पारगमन और सैन्य अड्डा था। टोंगा ने 4 जून 1970 को संरक्षित राज्य का दर्जा समाप्त किया, अपने विदेश संबंध फिर सँभाले और राष्ट्रमंडल में शामिल हुआ; 1999 में संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुआ। हाल के इतिहास में 16 नवंबर 2006 के नुकुआलोफा दंगे शामिल हैं, जिनमें व्यापारिक जिले का आधे से अधिक हिस्सा नष्ट हुआ और मौतें, आपातकालीन उपाय तथा सुरक्षा संबंधी परिणाम हुए। 2010 के संवैधानिक और चुनावी सुधारों ने प्रधानमंत्री चुनने की जिम्मेदारी विधान सभा को दी और सभा के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही बढ़ाई। सुधार के बाद चुनाव 25 नवंबर 2010 को हुआ और ʻअकिलिसी पोहिवा 2014 में उस सुधार-काल के पहले प्रधानमंत्री बने। चक्रवात गीता ने 2018 में पुराना संसद भवन नष्ट कर दिया। 15 जनवरी 2022 को हुंगा टोंगा–हुंगा हाअपाई ज्वालामुखी विस्फोट और सुनामी से कुछ तटों पर लगभग 10 मीटर ऊँची लहरें उठीं, चार लोगों की मृत्यु हुई, 1,500 से अधिक लोग विस्थापित हुए और द्वीपसमूह राख से ढक गया। आपातकाल लगभग एक वर्ष जारी रहा। टोंगा ने 2025 में अपने संविधान की 150वीं वर्षगाँठ मनाई। ऐतिहासिक साक्ष्यों में पुरातत्त्व, लापिता मिट्टी के बर्तन, वंशावलियाँ, मौखिक वृत्तांत, टोंगाई और यूरोपीय इतिहास-वृत्त, मिशन अभिलेख, कानून, संसदीय और न्यायालयी अभिलेख, संग्रहालय तथा विरासत डेटाबेस शामिल हैं। टोंगाई ऐतिहासिक आख्यानों को ऐतिहासिक कथन-परंपरा (talafakafonua) भी कहा जाता है। मौखिक वंशावलियों को अपने-आप सीधी कालक्रम-सूची नहीं मानना चाहिए; वे ज्ञान सुरक्षित रखती हैं, लेकिन उनमें प्रतिस्पर्धी दावे और बाद में किए गए बदलाव हो सकते हैं। पर्यटन, संस्कृति और विरासत विभाग, टोंगा राष्ट्रीय संग्रहालय, विधान सभा की संसद शिक्षा इकाई, टोंगा राष्ट्रीय विश्वविद्यालय पुस्तकालय और ʻअतेनिसी संस्थान विरासत, शिक्षा और शोध तक पहुँच के अलग-अलग साधन देते हैं। टोंगा राष्ट्रीय संग्रहालय अक्टूबर 2020 में फिर खुला, जबकि 2025–2028 के लिए नियोजित बड़ा संग्रहालय अभी निर्माणाधीन नहीं हुआ था। बाहरी द्वीपों के लिए विरासत का आधारभूत कार्य नियोजित था और संबंधित संग्रह न्यूज़ीलैंड तथा ऑस्ट्रेलिया की संस्थाओं में भी हैं। किसी एक केंद्रीकृत और आसानी से सुलभ राष्ट्रीय अभिलेखागार का विश्वसनीय प्रमाण नहीं है, इसलिए स्रोतों तक पहुँच बिखरी हुई है। संग्रहालय भ्रमण, संसद-दौरे, शोध और सामुदायिक गतिविधियों की व्यवस्थाएँ अलग-अलग संस्थानों पर निर्भर हैं। संसद-दौरे के लिए पहले से बुकिंग आवश्यक है। क्षेत्रीय शोध और पुरातात्त्विक खुदाई के लिए संबंधित विरासत निकायों, संस्थानों और समुदायों की अनुमति चाहिए। सामान्य ऐतिहासिक शोध के लिए देशव्यापी मानक शुल्क या समय-सीमा विश्वसनीय रूप से प्रकाशित नहीं है; अभिलेख, प्रतिलिपि और क्षेत्रकार्य की लागत परियोजना तथा संस्थान के अनुसार बदलती है। शोधकर्ताओं को स्थानीय ज्ञान-धारकों, स्रोत-वस्तुओं की उत्पत्ति, पवित्र स्थलों, मानव अवशेषों और संवेदनशील वंशावलियों का सम्मान करना चाहिए। सार्वजनिक स्मृति राजतंत्र, संप्रभुता, ईसाईकरण, संविधान और दृढ़ता को जोड़ती है। मुआ और लापाहा, लांगी, हाअमोंगा ʻa माउई, नुकुलेका, राजवंशीय इतिहास, 4 नवंबर का संविधान दिवस, 2006 के दंगे और 2022 का विस्फोट प्रमुख संदर्भ-बिंदु हैं। इसलिए टोंगा के इतिहास को समझते समय टोंगाटापू, हाआपाई, वावाउ, नियुआ और ʻएउआ के अंतर ध्यान में रखने चाहिए, न कि पूरे द्वीपसमूह को ऐतिहासिक रूप से एकसमान मानना चाहिए।
टोंगा में इतिहास
टोंगा का इतिहास पुरातत्त्व, वंशावलियों, मौखिक वृत्तांतों और लिखित अभिलेखों के माध्यम से देश के विकास का पता लगाता है। इसमें लापिता बस्ती, तुई टोंगा का राजनीतिक नेटवर्क, ईसाईकरण, आधुनिक राजतंत्र का गठन, ब्रिटिश संरक्षित राज्य, संवैधानिक सुधार और हाल की आपदाएँ शामिल हैं। इन कालखंडों को आलोचनात्मक दृष्टि से समझना चाहिए, क्योंकि स्रोत बाद के लिप्यंतरण, मिशनरी और औपनिवेशिक दृष्टिकोणों तथा परस्पर विरोधी वंशावली और साम्राज्यवादी व्याख्याओं को दर्शाते हैं।
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