आज के दक्षिण सूडान के भूभाग से मिले साक्ष्य असमान हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में लगभग 3000 ईसा पूर्व से 1500 ईस्वी तक के हैं। पुरातात्त्विक खोजें उत्तर पाषाण युग और आरंभिक लौह युग के समुदायों, पशुपालन, खेती और लौह-कार्य का दस्तावेजीकरण करती हैं। प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास नील गलियारे को नूबिया और व्यापक क्षेत्रीय नेटवर्क से जोड़ता है, जबकि मिस्री, नूबियाई और अरबी स्रोत अक्सर बाहरी नामों का उपयोग करते हैं और चुनिंदा स्थानों का ही वर्णन करते हैं। इन अभिलेखों की तुलना पुरातत्त्व और स्थानीय साक्ष्यों से करनी चाहिए; इन्हें एक निरंतर वृत्तांत नहीं मानना चाहिए। औपनिवेशिक शासन से पहले इस क्षेत्र में अनेक अलग-अलग समाज और राजनीतिक व्यवस्थाएँ थीं, जिनमें दिन्का या जिएंग, नुएर या नाथ, शिल्लुक या चोल्लो, बारी, आन्युआक या अनुआक, अज़ांदे या ज़ांदे, मुर्ले, टोपोसा, अचोली और मादी समुदाय शामिल थे। मुखियातंत्र, राजशाही व्यवस्थाएँ, आयु-समूह, नातेदारी संरचनाएँ और मवेशी-आधारित अर्थव्यवस्थाएँ अलग-अलग तरीकों से राजनीतिक और सामाजिक जीवन को आकार देती थीं। लगभग पंद्रहवीं सदी से शिल्लुक राज्य में रेथ के अधीन केंद्रीकृत राजसत्ता विकसित हुई। अज़ांदे और आन्युआक की राजनीतिक व्यवस्थाओं ने भी बड़े क्षेत्रों पर शासन किया। ये समूह एक समान राजनीतिक राष्ट्र नहीं थे; ‘जनजाति’ या ‘नीलोटिक’ जैसे शब्द बड़े अंतर छिपा सकते हैं। मिस्री-उस्मानी विस्तार, जिसे स्थानीय तौर पर तुर्कियाह कहा जाता है, 1820 से इस क्षेत्र तक पहुँचा। छावनियों, हाथीदाँत और दास व्यापार, हिंसा तथा जबरन विस्थापन ने स्थानीय अधिकारियों और व्यापार नेटवर्क को बाधित किया। 1885 से महदिया शासन आया और उससे भी बदलाव हुए। 1899 से 1956 तक एंग्लो-मिस्री प्रशासन ने व्यापक सूडान पर शासन किया। 1920 और 1930 के दशक की दक्षिणी नीति और बंद-जिला व्यवस्थाओं ने प्रशासन, शिक्षा और भाषा नीति को उत्तरी सूडान से अलग रखा। मिशन स्कूलों ने सीमित औपचारिक शिक्षा का विस्तार किया, जबकि अंग्रेज़ी और अरबी की भूमिकाएँ असमान रहीं। 1946–1948 के बाद निकट एकीकरण की नीति विकसित हुई, जो 1 जनवरी 1956 को सूडान की स्वतंत्रता से कुछ ही पहले थी। 1955 के टोरिट विद्रोह ने पहले सूडानी गृहयुद्ध की शुरुआत में मदद की; यह युद्ध 1972 तक चला। अदिस अबाबा समझौते ने दक्षिणी सूडान स्वायत्त क्षेत्र बनाया, लेकिन निमेरी सरकार ने 1983 में स्वायत्तता समाप्त कर दी और शरीअत लागू की। दूसरा गृहयुद्ध 1983 से 2005 तक चला। इसमें सूडान पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट/आर्मी, सूडानी सरकार और अन्य स्थानीय तथा क्षेत्रीय सशस्त्र पक्ष शामिल थे। विस्थापन, भूख, मानवाधिकार उल्लंघन और युद्धकालीन अर्थव्यवस्थाओं ने पूरे क्षेत्र के समुदायों को प्रभावित किया। 9 जनवरी 2005 के व्यापक शांति समझौते ने छह-वर्षीय अंतरिम व्यवस्था, दक्षिणी सूडान की सरकार और आत्मनिर्णय पर जनमत-संग्रह बनाया। अनसुलझे प्रश्नों में अबेई, सीमाएँ, तेल और संभावित अलगाव के बाद की नागरिकता शामिल थे। 9 से 15 जनवरी 2011 के जनमत-संग्रह में 98.83% ने अलगाव और 1.17% ने एकता के पक्ष में मतदान किया; मतदान 97.58% बताया गया। दक्षिण सूडान 9 जुलाई 2011 को स्वतंत्र हुआ, 14 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र का 193वाँ सदस्य बना और अगस्त 2011 में अफ्रीकी संघ में शामिल हुआ। देश के समकालीन इतिहास में 2013 में सूडान पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट के भीतर राजनीतिक विभाजन, दिसंबर 2013 में जुबा में हिंसा, 2016 में फिर से लड़ाई, 2015 और 2018 के शांति समझौते और 2020 में पुनर्जीवित संक्रमणकालीन राष्ट्रीय एकता सरकार का गठन शामिल हैं। एक रोडमैप ने संक्रमणकाल फरवरी 2025 तक बढ़ाया; 13 सितंबर 2024 के एक और निर्णय ने इसे फरवरी 2027 तक बढ़ाया। 12 सितंबर 2026 तक चुनाव दिसंबर 2026 के लिए निर्धारित थे, जबकि संवैधानिक, सुरक्षा, वित्तपोषण और राजनीतिक सहमति से जुड़े प्रश्न अनसुलझे थे। स्थानीय हिंसा और क्षेत्रीय तनाव ऐतिहासिक अभिलेख का हिस्सा बने हुए हैं; उनके आगे के क्रम को निश्चित नहीं माना जा सकता। दक्षिण सूडान का इतिहास मौखिक इतिहास, वंशावली की स्मृति, चर्च और मिशन के अभिलेखों, औपनिवेशिक फाइलों, सरकारी अभिलेखों, शांति समझौते के दस्तावेज़ों, पुरातत्त्व, नक्शों तथा जीवित बचे लोगों और समुदायों की गवाही में संरक्षित है। मौखिक इतिहास उन विवरणों को कहते हैं जिन्हें समुदाय याद रखते और आगे पहुँचाते हैं; ये आधिकारिक अभिलेखों से अनुपस्थित अनुभवों को बचा सकते हैं, लेकिन पीढ़ी, समूह, भाषा और राजनीतिक संदर्भ के अनुसार बदल सकते हैं। दक्षिण सूडान राष्ट्रीय अभिलेखागार, संस्कृति, संग्रहालय और राष्ट्रीय विरासत मंत्रालय, संग्रहालय, विश्वविद्यालय, चर्च, स्थानीय बुज़ुर्ग और अंतरराष्ट्रीय संग्रह अनुसंधान में योगदान देते हैं, हालाँकि पहुँच और डिजिटलीकरण असमान हैं। राष्ट्रीय अभिलेखागार की शुरुआत 1970 के दशक में हुई। 1981–1983 में जुबा भेजी गई लगभग 5,000 प्रांतीय फाइलें इसके संग्रह में आईं; 1983–2005 के युद्ध में संग्रह को नुकसान हुआ और 2005 के बाद यूनेस्को, यूएनओपीएस, रिफ्ट वैली इंस्टीट्यूट और ब्रिटिश इंस्टीट्यूट इन ईस्टर्न अफ्रीका के साथ बचाव, सूचीकरण और डिजिटलीकरण हुआ। संग्रह लगभग एक शताब्दी को समेटता है, लेकिन पूरा नहीं है। दक्षिण सूडान में इतिहास की व्याख्या एक जैसी नहीं है। स्वतंत्रता और मुक्ति के वृत्तांत एसपीएलएम/ए के पूर्व सैनिकों, शहीदों और पीड़ितों की स्मृतियों, दिन्का, नुएर, शिल्लुक, अज़ांदे, बारी, आन्युआक और अन्य समुदायों के दृष्टिकोणों तथा सूडानी और औपनिवेशिक विरासतों से प्रभावित व्याख्याओं के साथ मौजूद हैं। जातीय लेबल, इतिहास का राजनीतिक उपयोग, अनुवाद, बदलते स्थान-नाम और अधूरे अभिलेख घटनाओं की छवि बदल सकते हैं। वर्तमान दस राज्यों और प्रशासनिक क्षेत्रों को पुराने कालखंडों पर लागू नहीं करना चाहिए। ग्रेटर इक्वेटोरिया, ग्रेटर बहर अल ग़ज़ल, ग्रेटर अपर नाइल, सूड, श्वेत नील, सीमावर्ती क्षेत्र और अबेई के ऐतिहासिक मार्ग अलग हैं; अबेई को विवादित और परस्पर जुड़ा क्षेत्र मानना चाहिए, न कि स्वतः केवल दक्षिण सूडानी क्षेत्र।
दक्षिण सूडान में इतिहास
दक्षिण सूडान का इतिहास 2011 में बने राज्य से बहुत पहले तक जाता है। पुरातत्त्व, मौखिक परंपराएँ, लिखित अभिलेख और समुदायों की गवाही बदलते समाजों, व्यापार मार्गों, राजनीतिक व्यवस्थाओं, विदेशी हस्तक्षेपों और लंबे संघर्षों को सामने लाते हैं। आधुनिक देश सूडान के औपनिवेशिक और उत्तर-औपनिवेशिक इतिहास, 2005 के शांति समझौते और 2011 के स्वतंत्रता जनमत-संग्रह से उभरा।
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