नाउरू को नाउरू भाषा में नाओएरो (Naoero) भी कहा जाता है। यहाँ संभवतः कम-से-कम 3,000 वर्ष पहले लोग बसे थे। यहाँ की संस्कृति का मुख्य आधार माइक्रोनेशियाई था, जिसमें मेलनेशियाई और पॉलिनेशियाई प्रभाव भी हो सकते हैं; नाउरू भाषा की उत्पत्ति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। पारंपरिक जीवन नारियल, पैंडनस, प्रवाल-भित्ति में मछली पकड़ने और बुआडा लैगून में इबिजा—दूध-मछली के प्रबंधन—पर निर्भर था। समाज 12 मातृवंशीय जनजातियों या कुलों में संगठित था। कुल की सदस्यता माँ से मिलती थी, हर कुल का अपना प्रमुख था और भूमि तथा रिश्तेदारी सामाजिक जिम्मेदारियों को तय करते थे। नाउरू के ध्वज का 12-नुकीला तारा इन 12 जनजातियों को दर्शाता है। नाउरू के इतिहास की ऐसी लिखित कालक्रम-रेखा उपलब्ध नहीं है जिसे प्राचीन, मध्यकालीन और आरंभिक आधुनिक काल में भरोसे के साथ बाँटा जा सके। मौखिक इतिहास, वंशावलियाँ और पुरातात्त्विक प्रमाण पीढ़ियों के बीच निरंतरता दिखाते हैं, लेकिन शोध बिखरा हुआ है क्योंकि व्यवस्थित पुरातात्त्विक सर्वेक्षण नहीं हुआ और फॉस्फेट खनन ने केंद्रीय पठार को बड़े पैमाने पर बदल दिया। इस पठार को अक्सर टॉपसाइड (topside) कहा जाता है। यूरोपीय संपर्क 1798 में शुरू हुआ, जब जॉन फियरन के नेतृत्व में ब्रिटिश जहाज़ हंटर ने इस द्वीप को देखा; इसके बाद बाहरी लोगों ने इसका नाम प्लेज़ेंट आइलैंड रखा। उन्नीसवीं सदी में व्हेल-शिकार और व्यापार के संपर्कों के साथ समुद्रतटीय बाहरी लोग, शराब, हथियार और बीमारियाँ आए। 1878 से 1888 तक चले आंतरिक गृहयुद्ध में जनसंख्या का बड़ा हिस्सा मारा गया और इसका अंत जर्मन हस्तक्षेप तथा विलय से हुआ। जर्मनी ने 16 अप्रैल 1888 को घोषणा जारी की और 1 अक्टूबर 1888 को नियंत्रण स्थापित किया। स्थानीय प्रमुखों को नज़रबंद किया गया, जबकि जर्मन प्रशासन और ईसाई मिशन के काम ने स्थानीय सत्ता-संरचना को बदल दिया। अल्बर्ट एलिस ने 1900 में फॉस्फेट के भंडार पहचाने। व्यावसायिक खनन 1906 या 1907 में पैसिफ़िक फॉस्फेट कंपनी के माध्यम से शुरू हुआ और बाद में ब्रिटिश फॉस्फेट कमिश्नरों ने इसे चलाया। इसमें बाहर से मज़दूर लाए गए और इससे बीमारियाँ, सामाजिक उथल-पुथल तथा भूमि में व्यापक बदलाव हुए। 9 सितंबर 1914 को जर्मनी के आत्मसमर्पण के बाद ऑस्ट्रेलिया ने नवंबर में नाउरू पर कब्ज़ा कर लिया। वर्साय की संधि ने इस क्षेत्र का न्यास ब्रिटिश साम्राज्य को सौंपा। 2 जुलाई 1919 के नाउरू समझौते ने यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड को प्रशासन तथा फॉस्फेट संचालन की जिम्मेदारी दी। न्यास की व्यवस्थाओं को 1920 और 1923 में औपचारिक रूप दिया गया, जबकि व्यवहार में प्रशासन ऑस्ट्रेलिया चलाता था। 1920 के दशक में इन्फ्लुएंज़ा महामारी से नाउरू की आबादी तेजी से घटी। अंगाम नाउरू की स्मृति में उल्लास, विजय और घर-वापसी से जुड़ा एक शब्द है। ईडागरुवो 26 अक्टूबर 1932 को पहली अंगाम संतान और बेथेल एनप्रोए एडम 31 मार्च 1949 को दूसरी अंगाम संतान के रूप में प्रसिद्ध हुए; 26 अक्टूबर को अंगाम दिवस मनाया जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन हमलावर जहाज़ों ने 6 और 7 दिसंबर 1940 को फॉस्फेट और तेल सुविधाओं पर हमला किया। जापान ने 22 और 23 अगस्त 1942 को नाउरू पर बमबारी कर कब्ज़ा किया, 1943 में हवाई पट्टी और सैन्य अड्डा बनाया तथा जबरन मज़दूरी कराई। लगभग 1,200 नाउरूवासियों को 30 जून और 16 अगस्त 1943 को रुक (Ruk), जिसे ट्रुक (Truk) भी कहा जाता था और जो अब चूक (Chuuk) कहलाता है, निर्वासित किया गया। 31 जनवरी 1946 को केवल 737 लोग लौटे; रुक में 463 की मृत्यु हुई। 11 जुलाई 1943 को कुष्ठ रोग से पीड़ित 39 लोगों को समुद्र में ले जाया गया और वे मारे गए या लापता हो गए। जापान ने 13 सितंबर 1945 को ऑस्ट्रेलियाई सेना के सामने आत्मसमर्पण किया। युद्ध से भूख, बमबारी, बुनियादी ढाँचे का नुकसान और पर्यावरण को और क्षति पहुँची। 1946 में रुक से हुई घर-वापसी नाउरू के लोगों के जीवित बचने, स्मरण और बाद में चुनी गई स्वतंत्रता-तिथि—31 जनवरी—से गहराई से जुड़ गई। ऐवो में 2021 के द्वितीय विश्व युद्ध स्मारक में नाम, रुक और पूर्व कुष्ठ-रोग केंद्र की मिट्टी तथा परिवारों के वृत्तांत शामिल हैं। इन स्रोतों के दृष्टिकोण अलग हो सकते हैं: औपनिवेशिक प्रशासन और संसाधन संबंधी अभिलेख अक्सर जीवित बचने, नुकसान, घर-वापसी और संप्रभुता के नाउरूवासी वृत्तांतों से भिन्न होते हैं। 1947 के संयुक्त राष्ट्र न्यास समझौते के तहत नाउरू का प्रशासन ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और यूनाइटेड किंगडम के संयुक्त प्राधिकरण को सौंपा गया, जबकि द्वीप का प्रशासन ऑस्ट्रेलिया ही करता रहा। विवादों में फॉस्फेट रॉयल्टी, भूमि का पुनर्वास, राजनीतिक भागीदारी और कर्टिस द्वीप पर प्रस्तावित पुनर्वास शामिल थे। नाउरूवासियों ने प्रस्ताव अस्वीकार किया क्योंकि इससे संप्रभुता और पहचान को खतरा था। नाउरू ने विधान परिषद स्थापित की और जनवरी 1966 में पहला चुनाव कराया। संयुक्त राष्ट्र ने 19 दिसंबर 1967 को स्वतंत्रता को मंज़ूरी दी और नाउरू 31 जनवरी 1968 को स्वतंत्र हुआ। हैमर डीरोबर्ट एक प्रमुख राजनीतिक नेता थे और संविधान में 1967 का नाउरू द्वीप समझौता शामिल किया गया। स्वतंत्रता के बाद नाउरू ने अपने फॉस्फेट उद्योग का नियंत्रण संभाला। दीर्घकालीन निवेश, भूमि-मालिकों की रॉयल्टी, आवास और पुनर्वास को समर्थन देने के लिए 1968 में नाउरू फॉस्फेट रॉयल्टीज़ ट्रस्ट बनाया गया। फॉस्फेट से हुई ऊँची आय ने 1970 और 1980 के दशकों में प्रति व्यक्ति कमाई को असाधारण स्तर तक पहुँचाया। 1990 के दशक में निर्यात और राजस्व घटे और निवेश तथा प्रशासन संबंधी समस्याओं के कारण ट्रस्ट का बहुत-सा मूल्य खो गया। इसलिए फॉस्फेट पर निर्भरता, भूमि को हुआ नुकसान और औपनिवेशिक उत्खनन के परिणाम नाउरू के उत्तर-औपनिवेशिक इतिहास के केंद्रीय विषय बने हुए हैं। नाउरू बनाम ऑस्ट्रेलिया मामले में, जो 19 मई 1989 को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दायर हुआ, नाउरू ने खनन की गई फॉस्फेट भूमि और न्यास संबंधी दायित्वों के लिए ऑस्ट्रेलिया की जिम्मेदारी को चुनौती दी। 26 जून 1992 को न्यायालय ने ऑस्ट्रेलिया की अधिकांश प्रारंभिक आपत्तियाँ खारिज कर दीं। सितंबर 1993 में समझौते के बाद मामला समाप्त हुआ। ऑस्ट्रेलियाई संसदीय स्रोत के अनुसार, इसमें तत्काल A$57 मिलियन और 20 वर्षों तक हर साल A$2.5 मिलियन शामिल थे। यह समझौता खनन की गई समस्त भूमि की पूरी बहाली नहीं था; पुनर्वास और मुआवज़े के परिणामों पर विवाद जारी है। नाउरू 14 सितंबर 1999 को संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुआ। आज नाउरू की ऐतिहासिक स्मृति में संसाधनों पर निर्भरता, संप्रभुता, प्रवासी समुदाय और श्रम-प्रवास, युद्धकालीन नुकसान, भूमि की क्षति तथा पर्यावरणीय परिणाम भी शामिल हैं। राष्ट्रीय विरासत अधिनियम 2017 विरासत के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है। राष्ट्रीय विरासत, संस्कृति, पर्यटन विभाग और नाओएरो संग्रहालय, नाओएरो संग्रहालय, सरकारी सूचना कार्यालय, संसद, प्रमुख, बुज़ुर्ग, परिवार और स्थानीय इतिहासकार संरक्षण में योगदान देते हैं। नाउरू ने 22 जुलाई 2024 को यूनेस्को विश्व विरासत अभिसमय की पुष्टि की। यूनेस्को के मौजूदा अभिलेखों में नाउरू के लिए कोई विश्व विरासत स्थल या अस्थायी सूची का स्थल दर्ज नहीं है; विरासत सूची, राष्ट्रीय परामर्श और क्षमता-विकास का काम जारी है। ऐतिहासिक शोध के लिए कोई सामान्य, अनिवार्य पहुँच-शुल्क दर्ज नहीं है, लेकिन अभिलेखागार, संग्रहालय और समुदाय तक पहुँच संबंधित संस्था तथा स्थानीय नियमों पर निर्भर करती है। परिवार और युद्धकाल से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को सहमति तथा नाउरू की सांस्कृतिक स्वामित्व और संप्रभुता के सम्मान के साथ संभालना चाहिए।
नाउरू में इतिहास
नाउरू का इतिहास कम-से-कम 3,000 वर्षों के बसाव, कबीलाई और भूमि संबंधों में बदलाव, औपनिवेशिक शासन, फॉस्फेट खनन, युद्ध, न्यास-शासन और स्वतंत्रता तक फैला है। इसके प्रमाण नाउरू की मौखिक परंपराओं, परिवारों और कुलों के वृत्तांतों, पुरातत्त्व, संग्रहालयों, सरकारी स्मारक-स्रोतों, संयुक्त राष्ट्र के अभिलेखों और औपनिवेशिक दस्तावेज़ों से मिलते हैं। फॉस्फेट उत्खनन ने द्वीप के केंद्रीय पठार का स्वरूप बदल दिया और आज भी नाउरू के आर्थिक, पर्यावरणीय और राजनीतिक इतिहास का केंद्रीय हिस्सा है।
VivAVia से गलतियाँ हो सकती हैं। महत्वपूर्ण जानकारी की जाँच करें।

