भारत में आपराधिक कानून

भारत में आपराधिक कानून अपराधों को परिभाषित करता है, जाँच और मुकदमे की प्रक्रिया तय करता है तथा पीड़ितों, गवाहों और अभियुक्तों के अधिकारों की रक्षा करता है। पुलिस, अभियोजक, मजिस्ट्रेट, अदालतें और फोरेंसिक सेवाएँ अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते हैं। प्रथम सूचना रिपोर्ट, जिसे आम तौर पर FIR कहा जाता है, कई पुलिस जाँचों का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है, लेकिन अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है।

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