मंगोलिया में आधिकारिक लिखित मानक आधुनिक साहित्यिक मंगोलियाई है। सिरिलिक और पारंपरिक मंगोलियाई लिपि, दोनों के लिए सामान्य वर्तनी और व्याकरण के नियम हैं। मंगोलियाई भाषा नीति परिषद भाषा नीति की निगरानी करती है, जबकि विज्ञान अकादमी का मंगोलियाई भाषाविज्ञान संस्थान मानक, शब्दकोश और पारिभाषिक शब्दावली विकसित करता है और अनुसंधान करता है। रोज़मर्रा की बोली में खल्ख का प्रभुत्व है, लेकिन मंगोलिया में खल्ख, ओइरात, बुरियात और अन्य रूपों सहित व्यापक मंगोलियाई बोली-समूह भी है। 2020 की जनसंख्या और आवास जनगणना में पहली भाषा का सीधा वितरण दर्ज करने के बजाय जातीयता दर्ज की गई थी। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर बोलने वालों के प्रतिशत जनगणना से विश्वसनीय रूप से नहीं निकाले जा सकते, और किसी व्यक्ति की जातीय पहचान अपने आप उसकी भाषा तय नहीं करती। स्पष्ट रूप से दर्ज अल्पसंख्यक भाषाओं में कज़ाख सबसे बड़ी है, जिसका उपयोग विशेष रूप से बायान-ओल्गी में होता है। तुवन का उपयोग मुख्यतः त्सेंगेल में और त्सागान नूर तथा खोव्सगोल में भी होता है। बुरियात, ओइरात और दुखा या त्सातान भाषाएँ स्थानीय समुदायों में बनी हुई हैं, हालांकि देशभर में उनका प्रसार कम पूरी तरह दर्ज है। राज्य और स्थानीय स्वशासन निकाय, अदालतें, स्कूल और कानूनी संस्थाएँ आम तौर पर आधिकारिक संचार के लिए मंगोलियाई का उपयोग करती हैं। पहचान-पत्रों, जन्म और विवाह प्रमाणपत्रों, पासपोर्टों, शैक्षिक अभिलेखों, स्थानों और सड़कों के नामों, संस्थानों के नामों, सार्वजनिक सूचनाओं और सुरक्षा-संबंधी जानकारी में मंगोलियाई का उपयोग होता है। विदेशी दस्तावेज़ों के लिए मंगोलियाई अनुवाद की आवश्यकता हो सकती है। विदेशी कंपनियों और गैर-सरकारी संगठनों को अक्सर वित्त, कर, रोजगार और कार्यस्थल-सुरक्षा की जानकारी मंगोलियाई में चाहिए होती है। 1 जनवरी 2025 से आधिकारिक और स्थानीय प्रशासनिक पत्राचार में सिरिलिक के साथ पारंपरिक मंगोलियाई लिपि का भी उपयोग होता है। विद्यार्थी कक्षा 6 से स्कूल की पढ़ाई पूरी होने तक पारंपरिक लिपि सीखते हैं, और उच्च शिक्षा तथा शुरुआती स्तर की कुछ सिविल सेवा परीक्षाओं में इसका मूल्यांकन होता है। सार्वजनिक भाषा नीति में डिजिटल रूपांतरण और वर्तनी-जाँच के साधन भी शामिल हैं। सामग्री और पाठ्यक्रमों का कार्यान्वयन अभी विकसित हो रहा है, इसलिए संस्थान और प्रांत के अनुसार व्यावहारिक उपलब्धता अलग-अलग है। मंगोलिया में प्रांत को स्थानीय रूप से ऐमाग और जिले को सूम कहा जाता है। संविधान के अनुच्छेद 8(2) में राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों की मातृभाषाओं को शिक्षा, संचार, संस्कृति, कला और विज्ञान में संरक्षण दिया गया है। शिक्षा कानून के अनुसार पढ़ाई सामान्यतः आधिकारिक भाषा में होती है, साथ ही मातृभाषा में शिक्षा के अधिकार को भी मान्यता दी गई है। जब अधिकांश विद्यार्थी किसी अन्य भाषा वाले जातीय अल्पसंख्यक समुदाय से हों, तो द्विभाषी पाठ्यक्रम का उपयोग किया जा सकता है। यह संरक्षण स्थानीय प्रशासन में सामान्य सह-आधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं बनाता। बायान-ओल्गी में कज़ाख, तुवन और उरियांखाई समुदायों के लिए द्विभाषी और बहुभाषी शिक्षा के उदाहरण दर्ज हैं। शिक्षा प्राधिकरणों ने द्विभाषी शिक्षण पद्धतियों की योजना बनाई है। शिक्षा मंत्रालय ने द्विभाषी स्कूल योजनाओं, 8,000 से अधिक पारिभाषिक शब्दों वाली मंगोलियाई-कज़ाख और मंगोलियाई-तुवन शब्दावलियों, तुवन और कज़ाख में 104 आदर्श टेलीविज़न सामग्री और कक्षा 1 से 5 के लिए कार्यपुस्तिकाओं का दस्तावेज़ीकरण किया है। कार्यान्वयन और गुणवत्ता स्कूल तथा ऐमाग के अनुसार बदलती है। अदालती कार्यवाही मंगोलियाई में होती है। जो व्यक्ति मंगोलियाई नहीं जानता, उसे मातृभाषा या किसी अन्य ज्ञात भाषा में दुभाषिए या अनुवादक का अधिकार है। लिखित सामग्री, सांकेतिक भाषा, प्रतीकों या अन्य संचार तरीकों से भी सहायता मिल सकती है। प्रकाशित नियम दुभाषिया शुल्क या प्रतीक्षा समय के लिए एक समान राष्ट्रीय नियम तय नहीं करते। प्रसारण कानून के अनुसार रेडियो और टेलीविज़न में आम तौर पर मंगोलियाई का उपयोग होता है। विदेशी सामग्री के साथ वॉयस-ओवर या उपशीर्षक हो सकते हैं, और भाषा कानून मीडिया से साहित्यिक मंगोलियाई के मानकों का पालन करने की अपेक्षा करता है। भाषा नीति परिषद सरकारी संस्थानों और मीडिया के भाषा-उपयोग की निगरानी करती है। बायान-ओल्गी में अल्पसंख्यक भाषा प्रसारण के दर्ज उदाहरण हैं, जिनमें 1965 से संचालित क्षेत्रीय सार्वजनिक रेडियो या कज़ाख रेडियो और 2011 से संचालित डेरबेस टीवी शामिल हैं। ये स्थानीय मीडिया उपयोग के उदाहरण हैं, देशव्यापी सह-आधिकारिक प्रसारण व्यवस्था के नहीं। मंगोलियाई भाषा और लिपि मंगोलिया की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। अल्पसंख्यक भाषाएँ स्थानीय शिक्षा, मीडिया, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से कायम रखी जाती हैं। केंद्रीय प्रशासन तक पहुँच के लिए मुख्यतः मंगोलियाई की आवश्यकता होती है, जबकि स्थानीय द्विभाषी शिक्षा और अनुवाद भाषा-बाधाएँ कम कर सकते हैं। सार्वजनिक सेवा में प्रवेश के लिए मंगोलियाई भाषा-स्तर की परीक्षा होती है। सार्वजनिक स्कूलों, अदालतों या प्रशासन के माध्यम से इन भाषा-अधिकारों का उपयोग करने पर कोई सामान्य उपयोगकर्ता शुल्क तय नहीं है, लेकिन स्थानीय सुविधा और अनुवाद में लगने वाला समय अलग-अलग हो सकता है।
मंगोलिया में भाषा
मंगोलिया की राजकीय और आधिकारिक भाषा मंगोलियाई है। सार्वजनिक प्रशासन, शिक्षा, अदालतों, प्रसारण और कानूनी अभिलेखों में यही मुख्य भाषा है। आधुनिक साहित्यिक मंगोलियाई मानक रूप प्रदान करती है, जबकि रोज़मर्रा की बोली पर व्यापक मंगोलियाई बोली-समूह के भीतर खल्ख का प्रभुत्व है। 1 जनवरी 2025 से सरकारी और स्थानीय प्रशासनिक लेखन में पारंपरिक मंगोलियाई लिपि के साथ सिरिलिक का भी उपयोग किया जाता है। कज़ाख, तुवन और अन्य अल्पसंख्यक भाषाओं को संवैधानिक और शैक्षिक संरक्षण प्राप्त है, लेकिन उन्हें देशभर में सामान्य सह-आधिकारिक प्रशासनिक दर्जा नहीं है।
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