समोआ में स्थायी बसावट लगभग 3,000 वर्ष पहले शुरू हुई और इसका संबंध दूरस्थ ओशिनिया में लापिता लोगों की समुद्री यात्राओं से है। उपोलू के मुलीफ़ानुआ में समोआ का एकमात्र पुष्ट लापिता स्थल है, जहाँ लगभग 3,000 वर्ष पुराने मिट्टी के बर्तनों के 4,000 से अधिक टुकड़े मिले हैं। फ़ागालोआ खाड़ी-उफ़ातो-तियावेआ क्षेत्र में भी 3,000 वर्ष से अधिक पुरानी बसावट के प्रमाण हैं। बाद के समुदायों ने कृषि, समुद्री यात्रा और रिश्तेदारी, माताई नेतृत्व, गाँव की फ़ोनो बैठकों तथा क्षेत्रीय गठबंधनों पर आधारित राजनीतिक संबंध विकसित किए। फ़ोनो सामुदायिक बैठक है, जबकि माताई प्रमुख पदवीधारी होते हैं। मौखिक परंपराएँ वंशावलियों, स्थानों के इतिहास, गाँवों के ज्ञान और विश्व-दृष्टियों को संजोती हैं; कुछ वंशावलियाँ पाँच से छह सौ वर्ष पीछे तक जाती हैं। इन विवरणों की सावधानी से व्याख्या करनी चाहिए, इन्हें न तो केवल मिथक मानना चाहिए और न ही बिना सवाल किए कालक्रमिक अभिलेख। यूरोपीय काल-विभाजन समोआ पर ठीक से लागू नहीं होते। लगभग 1000 से 1700 ईस्वी के दौरान, यूरोपीय लोगों के लगातार संपर्क से पहले, बस्तियाँ, कृषि, समुद्री यात्राएँ और क्षेत्रीय राजनीतिक व्यवस्थाएँ विकसित होती रहीं। 1820 से 1870 के आसपास मनोनो एक प्रमुख राजनीतिक केंद्र बना और आइगा ई ले ताई ने मध्यस्थता तथा शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डच नाविक याकोब रोगेवीन 1722 में पहुँचे और लुई आंत्वान द बोगनविल ने 1768 में यात्रा की; इनके कारण द्वीपों को नेविगेटर द्वीपसमूह नाम मिला। उन्नीसवीं सदी में व्यापार, ईसाई मिशन, प्रवासन और विदेशी प्रभाव बढ़े। जॉन विलियम्स 1830 में सवाईई पहुँचे और लंदन मिशनरी सोसाइटी ने 1836 में मनोनो पर अपना मुख्य केंद्र स्थापित किया। ईसाई धर्म व्यापक हुआ और स्थानीय फ़ा'आ सामोआ—समोआ की सांस्कृतिक और सामाजिक व्यवस्था—से जुड़ गया। मिशनरी और यूरोपीय विवरण उपयोगी हैं, लेकिन उनमें अक्सर औपनिवेशिक धारणाएँ दिखाई देती हैं। उन्नीसवीं सदी में राजनीतिक संघर्ष तेज हुआ। तामा-आइगा और माताई गठबंधन सत्ता के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे थे, जबकि विदेशी शक्तियाँ व्यावसायिक और रणनीतिक हित साध रही थीं। 1889 के बर्लिन सामान्य अधिनियम ने अंतरराष्ट्रीय संयुक्त शासन और वाणिज्य-दूत व्यवस्था बनाई। 1899 के त्रिपक्षीय सम्मेलन ने द्वीपों को बाँटा: जर्मनी को पश्चिमी द्वीप मिले, जिनमें आज का समोआ क्षेत्र शामिल था, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका को पूर्वी द्वीप मिले, जिनमें तुतुइला और मनुआ शामिल हैं। इस अंतिम विभाजन में समोआ के नेताओं ने भाग नहीं लिया। जर्मनी ने 1900 से 1914 तक पश्चिमी द्वीपों का प्रशासन किया। वृक्षारोपण और श्रम व्यवस्था ने समोआ के अधिकार और स्थानीय आत्मनिर्णय पर दबाव डाला। न्यूज़ीलैंड की सेनाएँ 29 अगस्त 1914 को आपिया पहुँचीं। इसके बाद के प्रशासन के दौरान, चेतावनियों के बावजूद तालुने जहाज़ के आने के बाद 1918 की इन्फ्लुएंज़ा महामारी फैली और लगभग 8,500 लोगों की जान गई—कुल आबादी का करीब 22 प्रतिशत। लीग ऑफ़ नेशंस ने 1920 में ‘क्लास सी’ अधिदेश स्थापित किया, जिसके बाद 1921 का समोआ अधिनियम आया। 1923 में फ़ोनो ऑफ़ फ़ाइपुले को कानूनी मान्यता मिली और 1928 में पहले समोआ सदस्य विधायी परिषद में शामिल हुए। 1920 के दशक में माउ आंदोलन, जिसे लीग ऑफ़ समोआ भी कहा जाता था, ने विदेशी शासन का विरोध किया। 28 दिसंबर 1929 के ‘ब्लैक सैटरडे’ पर न्यूज़ीलैंड की सैन्य पुलिस ने कम से कम आठ समोआ लोगों को गोली मारी, जिनमें तुपुआ तमासेसे लियालोफ़ी तृतीय भी शामिल थे। न्यूज़ीलैंड ने 1935 में माउ को राजनीतिक मान्यता दी और 2002 में शुरुआती प्रशासनिक गलतियों तथा अन्याय के लिए माफ़ी माँगी। संयुक्त राष्ट्र का न्यास-समझौता 13 दिसंबर 1946 को लागू हुआ। समोआ ने धीरे-धीरे मंत्रिमंडलीय शासन और आंतरिक स्वशासन प्राप्त किया, फिर 28 अक्टूबर 1960 को संविधान अपनाया। 9 मई 1961 को संयुक्त राष्ट्र की जनमत-संग्रह प्रक्रिया हुई और 1 जनवरी 1962 को वेस्टर्न समोआ के रूप में स्वतंत्रता मिली। यह बीसवीं सदी का पहला स्वतंत्र प्रशांत राज्य बना। स्वतंत्रता के साथ न्यूज़ीलैंड के साथ मैत्री संधि भी हुई। 1997 के संवैधानिक संशोधन ने आधिकारिक नाम बदलकर स्वतंत्र राज्य समोआ किया और नाम से ‘वेस्टर्न’ हटा दिया। हाल के इतिहास में 2009 का सड़क-यातायात सुधार शामिल है, जिसके तहत यातायात बाईं ओर कर दिया गया; 2011 में अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा का बदलाव, जिससे 30 दिसंबर छोड़ दिया गया और न्यूज़ीलैंड तथा ऑस्ट्रेलिया से संबंध मज़बूत हुए; और 2009 की सुनामी। समोआ 2014 में अल्प-विकसित देशों की श्रेणी से बाहर आया। सार्वजनिक स्मृति में स्वतंत्रता, औपनिवेशिक अन्याय, इन्फ्लुएंज़ा महामारी, माउ आंदोलन और फ़ा'आ सामोआ आपस में जुड़े हैं। ऐतिहासिक शोध और सार्वजनिक पहुँच कई संस्थाओं में बँटी हुई है। समोआ का संग्रहालय, जिसे फ़लेमाताआगा कहा जाता है, ऐतिहासिक तस्वीरें, कलाकृतियाँ, लगभग 3,000 वर्ष पुराने मिट्टी के बर्तनों का संग्रह और एक पत्थर की कुल्हाड़ी रखता है। प्रवेश निःशुल्क है और दान स्वीकार किए जाते हैं। शिक्षा और संस्कृति मंत्रालय संग्रहालय वार्ताएँ, शैक्षिक भ्रमण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जानकारी, राष्ट्रीय विरासत स्थलों की सूची, अभिलेखागार तथा सार्वजनिक पुस्तकालय उपलब्ध कराता है। समोआ का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, जिसमें समोआ अध्ययन केंद्र और उसका पुरातत्व एवं सांस्कृतिक विरासत कार्य शामिल है, अध्ययन, क्षेत्र सर्वेक्षण, LiDAR मानचित्रण, उटु डेटाबेस और सामुदायिक अभिलेखन को समर्थन देता है। गाँव की फ़ोनो, आइगा और माताई मौखिक इतिहास तथा स्थान-संबंधी ज्ञान के महत्वपूर्ण संरक्षक और पहुँच के निर्णायक बने हुए हैं। परिवार या गाँव के ज्ञान तक पहुँचने के लिए स्थानीय सहमति आवश्यक हो सकती है और प्रथागत भूमि तथा ज्ञान की संवेदनशीलता का सम्मान करना चाहिए। राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के शोध के अनुसार, भूमि और उपाधि न्यायालय में 1903 से लिखे गए परिवार और गाँव के इतिहास सुरक्षित हैं। फ़ागालोआ खाड़ी-उफ़ातो-तियावेआ तथा मनोनो-अपोलिमा-नुलुओपा क्षेत्र यूनेस्को की अस्थायी सूची में हैं। समोआ में एक अकेला राष्ट्रीय इतिहास या विरासत प्राधिकरण, केंद्रीय पुरातत्व डेटाबेस या एकीकृत विरासत कानून नहीं है। जिम्मेदारियाँ सार्वजनिक संस्थाओं, विश्वविद्यालय, गाँवों, प्रथागत प्राधिकरणों और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं में बँटी हैं। समोआ विरासत प्राधिकरण, यानी पुलेगा ओ मेआसिना आ समोआ, की सिफारिश की गई है और यूनेस्को ने 2025 में राष्ट्रीय विरासत तथा पारंपरिक ज्ञान संबंधी कानून बनाने के काम को समर्थन दिया। शोध में हर अभिलेख के स्रोत, तारीख, दृष्टिकोण, सामुदायिक प्राधिकरण और संवेदनशीलता की पहचान करें; हर विवरण को समान रूप से प्रत्यक्ष प्रमाण न मानें।
समोआ में इतिहास
समोआ का इतिहास शुरुआती लापिता बसावट, समुद्री यात्राओं, गाँव और प्रमुखों की संस्थाओं, बाहरी संपर्क, औपनिवेशिक शासन, राजनीतिक विभाजन और स्वतंत्रता तक फैला है। आज का स्वतंत्र राज्य समोआ समोआ द्वीपसमूह के पश्चिमी हिस्से में है, जबकि अमेरिकी समोआ पूर्व का एक अलग क्षेत्र है। इतिहास की जानकारी पुरातत्व, मौखिक परंपराओं, वंशावलियों, भाषा-अध्ययन, मिशन अभिलेखों, औपनिवेशिक दस्तावेज़ों और सामुदायिक इतिहासों से मिलती है।
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