सबसे पुराने साक्ष्य खंडित हैं। सोमालीलैंड में लास गेल की शैलकला में मवेशी, भेड़, बकरियाँ और लोग दिखते हैं; इसके आरंभिक चरण सामान्यतः ईसा-पूर्व तीसरी से दूसरी सहस्राब्दी के बीच रखे जाते हैं, हालांकि तिथि-निर्धारण और व्याख्या पर बहस जारी है। चलायमान पशुपालन और कृषि-पशुपालन प्रणालियाँ क्षेत्रीय जीवन की दीर्घकालिक विशेषताएँ बनीं। अफ्रीका के हॉर्न की शैलकला और आर्थिक प्रणालियों में ऊँट बाद के समय में स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं—लगभग ईसा-पूर्व पहली सहस्राब्दी के अंत से पहली शताब्दी ईस्वी तक। शैलकला सोमाली जातीय उत्पत्ति का विश्वसनीय, सीधा कालक्रम प्रस्तुत नहीं करती। प्राचीन स्रोत अफ्रीका के हॉर्न को लाल सागर, अरब और हिंद महासागर के व्यापार से जोड़ते हैं। मिस्र के अभिलेखों में पुंट की भूमि से लोबान, गंधरस, हाथीदाँत और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का उल्लेख मिलता है, लेकिन वे पुंट की पहचान आज के सोमालिया या पंटलैंड से निश्चित रूप से नहीं करते। एरिथ्रियन सागर का पेरिप्लस, जिसे आमतौर पर लगभग 40–70 ईस्वी का माना जाता है, ओपोन सहित बंदरगाहों का वर्णन करता है। ओपोन को अक्सर रास हाफून से जोड़ा जाता है, लेकिन यह पहचान काल्पनिक परिकल्पना ही है। मलाओ को अक्सर बेरबेरा से जोड़ा जाता है, पर इस पहचान में भी सावधानी चाहिए। रास हाफून के मिट्टी के बर्तन और अन्य साक्ष्य दूरस्थ संपर्क दिखाते हैं, किसी एकीकृत प्राचीन सोमाली राज्य का अस्तित्व नहीं। लगभग सातवीं शताब्दी से तटीय केंद्रों के माध्यम से इस्लाम फैला। ज़ैला, जिसे सयलाक भी कहते हैं; मोगादिशु, जिसे एक्समर भी कहते हैं; मार्का, बरावा, बेरबेरा और हाफून बंदरगाह, व्यापार केंद्र और विद्या के स्थल बने। अरबी स्रोत मूल्यवान हैं, लेकिन उनका दायरा चयनित है। ज़ैला एक प्रमुख केंद्र था और इफात तथा अदल बदलते संबंधों और ईसाई इथियोपिया के साथ युद्धों में शामिल थे। अहमद इब्न इब्राहिम अल-गाज़ी के 1529 से 1543 के अभियानों से उत्तर मध्यकालीन काल और आरंभिक आधुनिक युग जुड़ते हैं। अजुरान सल्तनत ने जल प्रबंधन तथा नदियों और तटों पर नियंत्रण के ज़रिए दक्षिणी और मध्य सोमालिया के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया, हालांकि उसकी तिथियों और क्षेत्रीय पहुँच पर विवाद है। प्रवाल-पत्थर की मस्जिदें और शहरी अवशेष भौतिक साक्ष्य देते हैं। राजनीतिक जीवन में कबीलाई, बंदरगाह, सल्तनत, इस्लामी और व्यापारिक व्यवस्थाएँ साथ-साथ थीं; वह निरंतर राष्ट्रीय-राज्य मॉडल के अनुसार नहीं चला। सोलहवीं शताब्दी में पुर्तगाली हमलों, उस्मानी प्रभाव और लाल सागर के आसपास संघर्षों ने क्षेत्रीय व्यापार मार्ग बदल दिए। सत्रहवीं से उन्नीसवीं शताब्दी तक गेलेदी, होब्यो और मजीरतीन जैसी स्थानीय सल्तनतों और अमीरातों ने तटीय व्यापार, कारवाँ संपर्क, शबेले और जुबा नदियों के किनारे खेती तथा पशुपालक अर्थव्यवस्थाओं को आकार दिया। इन अवधियों के ऐतिहासिक क्षेत्रों और नामों को आधुनिक सीमाओं पर सीधे आरोपित नहीं करना चाहिए। दासता, जबरन अधीनता और उनसे जुड़े व्यापार भी क्षेत्रीय इतिहास का हिस्सा थे, हालांकि जगह और काल के अनुसार साक्ष्य अलग-अलग हैं। औपनिवेशिक शासन ने सोमाली आबादी वाले क्षेत्रों को कई प्रशासनों में बाँट दिया। ब्रिटिश सोमालीलैंड, इतालवी सोमालीलैंड, फ्रांसीसी सोमालीलैंड, इथियोपिया के सीमावर्ती क्षेत्र और केन्या के सीमावर्ती क्षेत्र अलग-अलग अधिकारियों के अधीन विकसित हुए। ब्रिटेन ने 1884 से 1889 के समझौतों के माध्यम से संरक्षित राज्य स्थापित किया, जबकि इटली ने 1889 से संरक्षण समझौते और तटीय नियंत्रण प्राप्त किए। सय्यद मुहम्मद अब्दुल्ला हसन के नेतृत्व में दरवेश प्रतिरोध 1899 से 1920 तक चला और सैन्य हार से पहले ब्रिटिश, इतालवी और इथियोपियाई सत्ता का विरोध करता रहा। 1925 में जुबालैंड को केन्या से इटली को हस्तांतरित किया गया। 1935–1936 में इथियोपिया के विरुद्ध इटली के युद्ध ने इस क्षेत्र को इतालवी पूर्वी अफ्रीका में शामिल कर दिया; 1941 से ब्रिटेन ने इसके बड़े हिस्से का सैन्य प्रशासन संभाला। 1950 से 1960 तक संयुक्त राष्ट्र का सोमालीलैंड न्यास क्षेत्र इटली के प्रशासन में था। ब्रिटिश सोमालीलैंड 26 जून 1960 को स्वतंत्र हुआ और 1 जुलाई 1960 को न्यास क्षेत्र के साथ मिलकर सोमाली गणराज्य बना। औपनिवेशिक प्रशासनों ने अलग-अलग कानूनी प्रणालियाँ, स्कूल, बुनियादी ढाँचे और राजनीतिक अभिजात वर्ग छोड़े, जिससे दोहरी संस्थागत विरासत बनी। औपनिवेशिक सीमाएँ और वृहत्तर सोमालिया का विचार क्षेत्रीय संघर्षों और राजनीतिक दावों को प्रभावित करते रहे। सोमाली गणराज्य 1960 से 1969 तक संसदीय, एकात्मक गणराज्य था। 1961 का संविधान और जनमत-संग्रह पूर्व ब्रिटिश और इतालवी व्यवस्थाओं के कठिन एकीकरण के साथ हुए। दलगत प्रतिस्पर्धा, कबीलाई गठबंधन और वृहत्तर सोमालिया की नीति ने आरंभिक राज्य को आकार दिया। सोमालिया ने 1964 में इथियोपिया से युद्ध किया और इथियोपिया, केन्या तथा जिबूती के सोमाली-आबादी वाले क्षेत्रों पर दावे किए। राष्ट्रपति अब्दिराशिद अली शेरमार्के की 15 अक्टूबर 1969 को हत्या कर दी गई। 21 अक्टूबर 1969 को मुहम्मद सियाद बर्रे ने सैन्य तख्तापलट से सत्ता संभाली, राजनीतिक दलों और संविधान को निलंबित किया तथा सर्वोच्च क्रांतिकारी परिषद स्थापित की। 1970 में सरकार ने वैज्ञानिक समाजवाद लागू किया, सत्ता केंद्रीकृत की और अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का राष्ट्रीयकरण किया। 1972 में सोमाली भाषा के लिए संशोधित लैटिन लिपि अपनाई और 1974 में अरब लीग में शामिल हुआ। 1977–1978 का ओगाडेन युद्ध सोमालिया की हार पर समाप्त हुआ, जब सोवियत संघ ने इथियोपिया का समर्थन करना शुरू किया। युद्ध ने सैन्यीकरण और राजनीतिक विरोध को तेज किया। 1978 में सोमाली साल्वेशन डेमोक्रेटिक फ्रंट, 1981 में सोमाली नेशनल मूवमेंट और बाद में सोमाली डेमोक्रेटिक मूवमेंट, सोमाली पैट्रियॉटिक मूवमेंट तथा यूनाइटेड सोमाली कांग्रेस प्रमुख सशस्त्र संगठन बने। 1988 में इथियोपिया के साथ समझौते के बाद उत्तर में लड़ाई तेज हुई और हरगेइसा सहित कई क्षेत्रों में भारी विनाश हुआ। 1991 में शासन गिर गया। इस अवधि की व्याख्या एक ही कारण से नहीं की जा सकती: औपनिवेशिक संस्थाएँ और सीमाएँ, सत्तावादी शासन, ओगाडेन युद्ध, शीतयुद्ध का हस्तक्षेप, आर्थिक बहिष्करण, भूमि और संसाधन नीति, सूखा, अकाल और सैन्यीकरण—सभी ने बाद में राज्य के विघटन में योगदान दिया। 1991 से 2000 तक दक्षिणी और मध्य सोमालिया में राज्य का पतन और गृहयुद्ध हुआ, जबकि अन्य जगहों पर राजनीतिक सत्ता अलग-अलग रूपों में जारी रही। मोगादिशु सशस्त्र गुटों के बीच बँटा था। सोमालीलैंड ने 1991 में स्वतंत्रता घोषित की और वास्तविक संस्थाएँ विकसित कीं, हालांकि उसे संप्रभु राज्य के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली। पंटलैंड ने 1998 में स्वायत्त प्रशासन स्थापित किया। संयुक्त राष्ट्र ने 1992 में हथियार प्रतिबंध लगाया और संयुक्त राष्ट्र सोमालिया अभियान बनाया; इसके बाद अमेरिका-नेतृत्व वाला संयुक्त कार्य बल और 1993 से 1995 के बीच संयुक्त राष्ट्र का दूसरा अभियान आया। इन हस्तक्षेपों में मानवीय राहत के साथ शांति-स्थापना और राज्य-पुनर्निर्माण के बाहरी प्रयास शामिल थे, लेकिन स्थिर राष्ट्रीय समझौता नहीं बना। 2000 के अर्टा सम्मेलन से संक्रमणकालीन राष्ट्रीय सरकार और 4.5 सत्ता-साझेदारी सूत्र बना, जिसने बातचीत से तय कबीलाई व्यवस्था के माध्यम से राजनीतिक प्रतिनिधित्व बाँटा। 2004 में संक्रमणकालीन संघीय सरकार बनी। 2006 में इस्लामिक कोर्ट्स यूनियन ने मोगादिशु पर नियंत्रण किया, लेकिन उसी वर्ष के अंत में इथियोपियाई हस्तक्षेप ने उसे हटा दिया और अल-शबाब के उदय में योगदान दिया। अफ्रीकी संघ मिशन इन सोमालिया ने 2007 में काम शुरू किया। 2012 के अंतरिम संघीय संविधान ने सोमालिया की संघीय सरकार बनाई और संक्रमण औपचारिक रूप से समाप्त किया। 2013 से 2016 के बीच कई संघीय सदस्य राज्य स्थापित या सुदृढ़ हुए, लेकिन संघीय सरकार और सदस्य राज्यों के बीच अधिकार, सीमाओं और संसाधनों को लेकर विवाद जारी रहे। 2017 में सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण हुआ। 2020 और 2021 के चुनावों में देरी के कारण अप्रत्यक्ष चुनाव मॉडल जारी रहा। हसन शेख मोहम्मद 2022 में फिर राष्ट्रपति बने। 2022 और 2023 में अल-शबाब के विरुद्ध सरकारी अभियानों से कुछ क्षेत्र वापस मिले, लेकिन जवाबी हमले और विस्थापन हुए। सोमालिया 2023 में भारी ऋणग्रस्त गरीब देशों की पहल के अंतिम चरण तक पहुँचा और 2024 में पूर्वी अफ्रीकी समुदाय में शामिल हुआ। 2024 में अपनाए गए संवैधानिक बदलावों का उद्देश्य प्रत्यक्ष राष्ट्रपति चुनावों की ओर बढ़ना था; इससे विपक्षी समूहों और संघीय सदस्य राज्यों के साथ विवाद पैदा हुए। पंटलैंड ने संघीय सरकार से दूरी बनाई, जुबालैंड के आसपास संघर्ष जारी रहा और सूल तथा सानाग विवादित रहे। अफ्रीकी संघ संक्रमण मिशन इन सोमालिया की जगह 1 जनवरी 2025 को अफ्रीकी संघ समर्थन और स्थिरीकरण मिशन इन सोमालिया ने ली। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन सोमालिया 31 अक्टूबर 2024 को संयुक्त राष्ट्र संक्रमण मिशन इन सोमालिया बना; संक्रमण और समापन 31 अक्टूबर 2026 तक नियोजित हैं। कई विषय अलग-अलग कालों को जोड़ते हैं। मानसूनी हवाओं, लाल सागर के मार्गों और हिंद महासागर के जहाज़ी रास्तों ने सोमाली बंदरगाहों को अरब, पूर्वी अफ्रीका और दक्षिण एशिया से जोड़ा। पशुपालन, नदी-आधारित खेती, बंदरगाह व्यापार और प्रवासन अलग-अलग इतिहास नहीं थे, बल्कि एक-दूसरे से जुड़े थे। इस्लाम, कबीलाई सामाजिक संगठन और ज़ीर ने सहयोग और विवाद-निपटान को प्रभावित किया। ज़ीर मौखिक रूप से आगे बढ़ाए गए प्रथागत नियमों का समूह है, जिनकी सामग्री समुदायों के अनुसार बदलती है; यह एक समान संहिताबद्ध राष्ट्रीय कानून नहीं है। सोमाली कविता और मौखिक परंपरा राजनीतिक स्मृति, वंशावली और सामाजिक ज्ञान को सुरक्षित रखती हैं; महिलाओं, बुज़ुर्गों और स्थानीय समुदायों की इन्हें आगे पहुँचाने में केंद्रीय भूमिका है। सूखा, जलवायु आघात, प्रवासन तथा भूमि और संसाधनों को लेकर विवादों ने बार-बार ऐतिहासिक व्यवधान और सहयोग के नए रूप पैदा किए। अनुसंधान में पुरातात्विक स्थल, अरबी भूगोल और इतिहास-वृत्तांत, एरिथ्रियन सागर का पेरिप्लस, पुंट से जुड़े मिस्री साक्ष्य, यूरोपीय औपनिवेशिक अभिलेखागार, राज्य और संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज़, मौखिक इतिहास, वंशावलियाँ, कविता, रेडियो रिकॉर्ड और दस्तावेज़ी अभिलेखागार उपयोग किए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र, यूनेस्को, कांग्रेस पुस्तकालय और विश्व बैंक के सार्वजनिक डिजिटल संग्रह आम तौर पर निःशुल्क उपलब्ध हैं। स्थल-कार्य और स्थलों तक पहुँच सुरक्षा, संरक्षण की स्थिति और स्थानीय सहमति पर निर्भर करती है, जो काफी भिन्न होती है। संघर्ष और सीमित पहुँच के कारण दक्षिणी और मध्य सोमालिया के लिए अनुसंधान विशेष रूप से अधूरा है। मौखिक विवरण आवश्यक साक्ष्य हैं, लेकिन उनसे अपने-आप निश्चित कालक्रम नहीं मिलता; उनकी तुलना भौतिक, लिखित और रिकॉर्ड किए गए स्रोतों से करनी चाहिए। संघीय सूचना, संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय, उसका संस्कृति विभाग, सोमालिया विज्ञान और कला अकादमी, सोमाली राष्ट्रीय यूनेस्को आयोग, विश्वविद्यालय, संघीय सदस्य राज्य और सोमालीलैंड के अधिकारी, संग्रहालय, पुस्तकालय, मीडिया अभिलेखागार, बुज़ुर्ग और स्थानीय समुदाय—सभी इतिहास और विरासत के काम में योगदान देते हैं। राष्ट्रीय संग्रहालय, राष्ट्रीय पुस्तकालय और राष्ट्रीय रंगमंच लगभग तीन दशकों के संघर्ष-संबंधी व्यवधान के बाद फिर खुले हैं। रेडियो मोगादिशु अभिलेखागार जीवित राष्ट्रीय स्मृति-संसाधन है। सोमालिया ने यूनेस्को विश्व विरासत अभिसमय और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के 2003 अभिसमय की पुष्टि की; दोनों 23 अक्टूबर 2020 से लागू हुए। 2025 तक सोमालिया के कोई यूनेस्को विश्व विरासत स्थल नहीं थे और तीन स्थल अस्थायी सूची में थे। युद्ध, लूट, शहरीकरण, सीमित संरक्षण क्षमता और असुरक्षित स्थल-पहुँच से विरासत को खतरा बना हुआ है। सभी ऐतिहासिक सामग्री को समेटने वाला कोई एक राष्ट्रीय अभिलेखागार या समान राष्ट्रीय पहुँच प्रक्रिया नहीं है। ऐतिहासिक स्मृति विवादित है। संघीय सरकार के क्षेत्रीय एकता के दावे से सोमालीलैंड का संस्थागत और राजनीतिक इतिहास अलग है। वृहत्तर सोमालिया की स्मृतियों में इथियोपिया, केन्या और जिबूती के सोमाली-आबादी वाले क्षेत्र शामिल हैं; उन्हें वर्तमान गणराज्य का वर्णन नहीं समझना चाहिए। 1991 के पतन से दक्षिणी और मध्य सोमालिया के बड़े हिस्से में केंद्रीय सरकार का नियंत्रण समाप्त हुआ, लेकिन हर प्रकार का शासन समाप्त नहीं हुआ। सियाद बर्रे की विरासत में राज्य-नेतृत्व वाला आधुनिकीकरण और सोमाली राष्ट्रवाद भी शामिल हैं, और दमन तथा केंद्रीकरण के परस्पर विरोधी साक्ष्य भी—यह इस बात पर निर्भर करता है कि किन स्रोतों और समुदायों को देखा जाए। विश्वसनीय इतिहास आधिकारिक अभिलेखों, स्थानीय गवाही, कबीलाई और प्रवासी स्मृतियों, भौतिक साक्ष्य और बाहरी विवरणों की तुलना करता है; किसी एक आख्यान को पूर्ण नहीं मानता।
सोमालिया में इतिहास
सोमालिया का इतिहास प्रागैतिहासिक पशुपालक समुदायों से लेकर वर्तमान तक बदलते समाजों, अर्थव्यवस्थाओं, राजनीतिक व्यवस्थाओं और संबंधों का इतिहास है। इसके साक्ष्यों में पुरातत्व, अरबी और यूरोपीय अभिलेख, राज्य और संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज़, अभिलेखागार, मौखिक इतिहास, वंशावलियाँ और कविता शामिल हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी असमान है—विशेषकर दक्षिणी और मध्य सोमालिया के लिए। तटीय व्यापार, इस्लाम, सामुदायिक संगठन, औपनिवेशिक विभाजन, राज्य-निर्माण, संघर्ष और प्रवासी समुदायों की स्मृतियों ने देश को आकार दिया, पर कोई निरंतर केंद्रीकृत सोमाली राज्य नहीं बना। इतिहास की व्याख्या में आज के सोमालिया को व्यापक सोमाली क्षेत्रों से अलग पहचानना और परस्पर प्रतिस्पर्धी आधिकारिक, स्थानीय तथा सामुदायिक स्मृतियों की तुलना करना आवश्यक है।
VivAVia से गलतियाँ हो सकती हैं। महत्वपूर्ण जानकारी की जाँच करें।

