पुर्तगाली स्रोतों के अनुसार, साओ टोमे को 1470 में और प्रिंसिपे को 1471 में देखा गया था। इन स्रोतों में उस समय द्वीपों को निर्जन बताया गया है, और स्थानीय रूप से उपलब्ध कोई विश्वसनीय साक्ष्य स्थायी पुर्तगाल-पूर्व बसावट की पुष्टि नहीं करता। शोध में मौजूद कमियों के कारण यहाँ के प्राचीन या मध्ययुगीन स्थानीय इतिहास को बिना टूटे जारी रहने वाला बताना सुरक्षित नहीं है। 1493 में ताज की रियायत और बसावट शुरू हुई, और 1502 में प्रिंसिपे पर सान्तो आंताओ प्रदान किया गया। पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दियों में एन्जेन्योस और रोसास के जरिए चीनी उत्पादन बढ़ा। अंगोला और कांगो क्षेत्रों तथा अफ्रीका के अन्य हिस्सों से लाए गए गुलाम बनाए गए अफ्रीकियों से श्रम कराया गया। इससे साओ टोमे एक शुरुआती उष्णकटिबंधीय बागान समाज और अटलांटिक व्यापार केंद्र बना। 1595 में अमादोर से जुड़े नेतृत्व में एक बड़ा विद्रोह हुआ; उन्हें रेई अमादोर या अंगोलेरेस के नाम से भी याद किया जाता है। उनकी राजनीतिक भूमिका, विद्रोह का क्रम और बाद की व्याख्याएँ स्रोतों में आंशिक रूप से विवादित हैं। ब्राज़ील से प्रतिस्पर्धा, विद्रोहों, कर्ज और विनाश के कारण सत्रहवीं और अठारहवीं शताब्दियों में चीनी उत्पादन घटा। डच सेनाओं ने 1641 से 1649 तक साओ टोमे पर कब्जा किया। बदलते औपनिवेशिक संबंधों के बीच द्वीपों ने बंदरगाह और दास व्यापार के काम जारी रखे, जबकि फोरो और अंगोलेरेस समुदाय तथा स्थानीय अभिजात वर्ग विकसित हुए। उन्नीसवीं शताब्दी में कॉफी और कोको प्रमुख फसलें बने। रोसास व्यवस्था में बागानों के साथ प्रसंस्करण सुविधाएँ, आवास और सामाजिक ढाँचा शामिल था। पुर्तगाल ने 1875 और 1876 में अपने साम्राज्य में दासता को औपचारिक रूप से समाप्त किया, लेकिन मुख्यतः अंगोला, मोज़ाम्बिक और काबो वर्दे से भर्ती किए गए कॉन्ट्राटो और सर्विसाइस श्रमिकों के साथ कर्ज, आवागमन पर रोक और अलगाव जैसी जबरन श्रम की विशेषताएँ बनी रहीं। कई फोरो लोगों ने बागानों में काम करने से इनकार किया। बीसवीं शताब्दी के पहले आधे में साओ टोमे में लगभग 200 रोसास थे और यह दुनिया के प्रमुख कोको उत्पादकों में शामिल था। भूमि से बेदखली, औपनिवेशिक पदानुक्रम और श्रम प्रवासन ने दोनों द्वीपों को आकार दिया; प्रिंसिपे पर सुंडी और बेलो मोंटे बड़े बागान केंद्र बने। 1953 में बातेपा दमन की घटना फोरो और अन्य स्थानीय पक्षों से जुड़े जबरन भर्ती और श्रम संघर्षों के बाद हुई। पीड़ितों की संख्या निर्णायक रूप से स्थापित नहीं हुई है; अनुमान लगभग 50 से लेकर 1,000 से अधिक तक हैं। 2018 के एक स्मारक में 474 दर्ज नाम हैं। इस घटना को हर साल 3 फरवरी को राष्ट्रीय स्तर पर दिया दोस मार्तिरिस या हेरोइस दा लिबेर्दाद के रूप में याद किया जाता है, जबकि अनुमानों और व्यापक विवरण का अर्थ विवादित है। 1960 के दशक में राष्ट्रवादी संगठन उभरे, जिनमें सीएलएसटीपी भी था, जो आगे चलकर एमएलएसटीपी बना। पुर्तगाल की 1974 की कार्नेशन क्रांति के बाद 26 नवंबर 1974 के अल्जीयर्स समझौते ने एमएलएसटीपी को पुर्तगाल का एकमात्र वार्ताकार बनाया। 7 जुलाई 1975 को संविधान सभा का चुनाव हुआ। साओ टोमे और प्रिंसिपे 12 जुलाई 1975 को स्वतंत्र हुआ और उसी वर्ष बाद में संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुआ। 1975 से 1990 तक देश में एकदलीय व्यवस्था और समाजवादी, केंद्रीय रूप से नियोजित अर्थव्यवस्था थी। 30 सितंबर 1975 को रोसास के राष्ट्रीयकरण से सरकारी फार्म बने, लेकिन कोको की एकल-फसल खेती ने उत्पादन और जीवन-स्तर की समस्याओं में योगदान दिया। 1985 में आर्थिक उदारीकरण शुरू हुआ; इसके बाद 1990 में संवैधानिक सुधार और राजनीतिक बहुलवाद आया। पहला बहुदलीय संसदीय चुनाव 20 जनवरी 1991 को और पहला प्रत्यक्ष राष्ट्रपति चुनाव 3 मार्च 1991 को हुआ। नियमित चुनाव और सत्ता परिवर्तन जारी रहे, हालाँकि गठबंधन और सरकारों में अस्थिरता बनी रही। 1995 और 2003 में तख्तापलट के प्रयास हुए; 2003 के संकट ने संवैधानिक व्यवस्था को स्थायी रूप से निलंबित नहीं किया। 29 अप्रैल 1995 को प्रिंसिपे प्रिंसिपे का स्वायत्त क्षेत्र बना, जिसका अपना क्षेत्रीय विधानसभा और सरकार है। साओ टोमे छह जिलों में बँटा है। बागान स्थलों, राजनीतिक अधिकार, अभिलेखों और स्मरणोत्सवों का अध्ययन करते समय द्वीपों के इस अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है। 2025 में राज्य ने स्वतंत्रता के पचास वर्ष मनाए। 2026 में यूनेस्को ने साओ टोमे और प्रिंसिपे के रोसास को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया; इसमें मोंटे काफे, आगुआ इज़े, डिओगो वाज़, साओ जोआओ, सुंडी और बेलो मोंटे शामिल हैं। यह सूची औपनिवेशिक कृषि-औद्योगिक व्यवस्था और जबरन प्रवासन को केंद्रीय ऐतिहासिक साक्ष्य के रूप में मान्यता देती है। शोध में स्कूल और विश्वविद्यालय शिक्षण, साओ टोमे और प्रिंसिपे का ऐतिहासिक अभिलेखागार, राष्ट्रीय संग्रहालय, राष्ट्रीय पुस्तकालय, यूएसटीपी, ऐतिहासिक स्थल, स्मरणोत्सव, मौखिक इतिहास और लिखित तथा भौतिक स्रोतों की तुलना को जोड़ा जा सकता है। ऐतिहासिक अभिलेखागार से स्थानीय स्तर पर ईमेल, टेलीफोन या व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया जा सकता है, हालाँकि उसकी वेबसाइट के काम न करने की सूचना दी गई थी। राष्ट्रीय पुस्तकालय पोर्टल तक पहुँच के लिए पंजीकरण और पुस्तकालय की पुष्टि आवश्यक है। लिस्बन का आर्किवो हिस्टोरिको उल्त्रामारिनो समानांतर औपनिवेशिक संग्रह रखता है। ऐतिहासिक शोध तक पहुँच के लिए कोई विश्वसनीय राष्ट्रव्यापी शुल्क या निश्चित समय-सीमा प्रकाशित नहीं है, इसलिए प्रतिलिपि, अभिलेखागार और यात्रा की लागत अलग-अलग पुष्ट करनी चाहिए। एमईसीसीईएस, संस्कृति महानिदेशालय, संग्रहालय, अभिलेखागार, पुस्तकालय, यूएसटीपी, प्रिंसिपे का स्वायत्त क्षेत्र और यूनेस्को सहयोग प्रासंगिक संस्थागत संपर्क हैं। कोई स्रोत औपनिवेशिक, राष्ट्रवादी या स्मरणोत्सव संबंधी हितों को प्रतिबिंबित कर सकता है; स्रोत की उत्पत्ति, तारीख, लेखकत्व, उद्देश्य और स्वतंत्र विवरणों की तुलना से दर्ज साक्ष्य को बाद की व्याख्या से अलग करने में मदद मिलती है।
साओ टोमे और प्रिंसिपे में इतिहास
साओ टोमे और प्रिंसिपे का समाज पुर्तगाली बसावट और बागान उपनिवेशवाद से विकसित हुआ। इसे चीनी, कोको, जबरन श्रम, प्रवासन, उपनिवेशवाद-विरोधी राजनीति और 1975 की स्वतंत्रता ने आकार दिया। ये द्वीप अटलांटिक के शुरुआती बागान और दास श्रम केंद्रों में शामिल थे; औपचारिक उन्मूलन के बाद भी बाद के रोसास में कॉन्ट्राटो और सर्विसाइस श्रम का इस्तेमाल हुआ। इतिहास को समझने के लिए औपनिवेशिक अभिलेखों, स्थानीय संस्थाओं, मौखिक गवाही, स्मरणोत्सवों और भौतिक स्थलों की तुलना जरूरी है, क्योंकि अमादोर, बातेपा और अन्य स्मृतियों के विवरणों में मतभेद हो सकते हैं।
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