कंबोडिया बौद्ध धर्म को राजधर्म मानता है, जबकि उसका संविधान आस्था और उपासना की स्वतंत्रता की रक्षा करता है और धार्मिक विश्वास के आधार पर समानता का प्रावधान करता है। 2019 की सामान्य जनसंख्या जनगणना में 97.1% आबादी बौद्ध, 2.0% मुस्लिम, 0.3% ईसाई और 0.5% अन्य धार्मिक संबद्धताओं वाली दर्ज की गई। अंतिम आंकड़े में पहाड़ी क्षेत्रों के स्वदेशी धर्म और अन्य अल्पसंख्यक धार्मिक परंपराएँ शामिल हैं, इसलिए प्रांतीय आंकड़ों को राष्ट्रीय औसत नहीं मानना चाहिए। कुछ क्षेत्रों में चाम समुदायों सहित मुस्लिम समुदाय विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, जबकि पहाड़ी इलाकों के कुछ हिस्सों में स्वदेशी धार्मिक प्रथाओं का खास महत्व है। छोटे बहाई, यहूदी और काओ दाई समुदाय भी मौजूद हैं। अधिकांश थेरवाद बौद्ध उपासना पगोडा में होती है, जिसे वाट भी कहा जाता है। कंबोडिया में थेरवाद बौद्ध संघ की दो मुख्य निकाय परंपराएँ हैं: महानिकाय (Mahanikay) और धम्मयुत्तिका निकाय (Dhammayuttika Nikaya)। भिक्षुओं को भिक्खु (bhikkhu) और नवदीक्षित भिक्षुओं को सामणेर (samanera) कहा जाता है। आम प्रथाओं में उपासना, प्रार्थना, पुण्य अर्जित करना, भोजन, वस्त्र या धन के रूप में दान (dana) देना, सुत्तों या धम्म ग्रंथों का पाठ, ध्यान और वस्सावास (Vassa) के दौरान पालन शामिल हैं। परिवार इन प्रथाओं के साथ स्थानीय पारिवारिक या पूर्वज-संबंधी रीति-रिवाज भी अपना सकते हैं। धार्मिक सहभागिता के लिए आम तौर पर राष्ट्रीय सदस्यता कार्ड या निश्चित योगदान आवश्यक नहीं होता; व्यवस्था अक्सर समुदाय या किसी व्यक्तिगत पगोडा के माध्यम से होती है। पंथ और धर्म मंत्रालय (Ministry of Cult and Religion), जिसे खमेर भाषा में धर्म और पंथ मंत्रालय भी कहा जाता है, धार्मिक मामलों का प्रशासन करता है। बौद्ध मामलों के विभाग, संघ परिषदों, सर्वोच्च पितृपुरुषों और स्थानीय पगोडा समितियों की बौद्ध संस्थाओं में अलग-अलग जिम्मेदारियाँ हैं। धार्मिक संगठन मंत्रालय में पंजीकरण कराते समय अपने उद्देश्यों, नेतृत्व, वित्तपोषण और वार्षिक गतिविधियों की जानकारी देते हैं। व्यक्तिगत श्रद्धालुओं के लिए आम तौर पर अलग राष्ट्रीय धार्मिक पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती। गैर-बौद्ध संप्रदायों द्वारा सार्वजनिक धर्म-प्रचार पर प्रतिबंध है और भिक्षुओं से राजनीतिक रूप से तटस्थ रहने की अपेक्षा की जाती है। धार्मिक गतिविधियों या भवनों के लिए अनुमति और रिपोर्टिंग की शर्तें संबंधित इलाके और संस्था पर निर्भर हो सकती हैं। धार्मिक स्थलों के व्यावहारिक नियम आम तौर पर वे स्वयं तय करते हैं। आगंतुकों को जूते उतारने और पवित्र स्थलों पर सिर ढकने या सम्मानजनक कपड़े पहनने की जरूरत हो सकती है। महिलाओं को भिक्षु के वस्त्र या शरीर को नहीं छूना चाहिए। पगोडा, मस्जिद, गिरजाघर या सामुदायिक स्थल पर उपासना के लिए कोई सत्यापित राष्ट्रव्यापी प्रवेश शुल्क नहीं है; स्वैच्छिक भेंट और दान आम हैं। समारोह, यात्रा या संगठित गतिविधियों से पहले स्थानीय नियमों की जानकारी लें। बौद्ध त्योहार चंद्र कैलेंडर के अनुसार होते हैं। विसाक बोचिया बुद्ध के जन्म, ज्ञान-प्राप्ति और परिनिर्वाण की स्मृति में मनाया जाता है और 1 मई 2026 को सार्वजनिक अवकाश था। पचुम बेन पूर्वजों और मृतकों से जुड़े 15-दिवसीय अनुष्ठानों का समय है, जिसमें भिक्षुओं को भोजन अर्पित करना भी शामिल है; इसके सार्वजनिक अवकाश 10 से 12 अक्टूबर 2026 तक हैं। अन्य तिथियाँ वार्षिक कैलेंडर के अनुसार बदलती हैं। धार्मिक शिक्षा में पगोडा-आधारित, पाली और मठवासी अध्ययन शामिल हैं, जबकि संविधान पाली स्कूलों और बौद्ध संस्थान का समर्थन करता है। पहुँच, अवधि और शुल्क के लिए कोई राष्ट्रव्यापी मानक तय नहीं है। जीवन की प्रमुख घटनाओं से जुड़ी प्रथाएँ धर्म और समुदाय के अनुसार बदलती हैं। बौद्ध अंत्येष्टि में अक्सर भिक्षुओं का मंत्र-पाठ, आशीर्वाद और पगोडा की रस्में शामिल होती हैं। मुस्लिम और अन्य समुदाय दफ़नाने और शोक की अपनी परंपराओं का पालन करते हैं। दीक्षा और नवदीक्षित भिक्षुओं के रास्ते आम तौर पर स्थानीय स्तर पर तय होते हैं। पंथ और धर्म मंत्रालय के 2026 के एक उदाहरण में बेटों के लिए सामणेर मार्ग और बेटियों के लिए सिलवती (Silvati) मार्ग के साथ पाँच-दिवसीय धम्म-विनय (Dharma-Vinaya) पाठ्यक्रम का उल्लेख था। यह उदाहरण राष्ट्रीय मानक स्थापित नहीं करता। मंत्रालय बौद्ध, मुस्लिम, ईसाई और स्वदेशी प्रतिनिधियों के साथ समन्वय भी करता है, लेकिन राष्ट्रव्यापी एक-खिड़की अंतरधार्मिक पंजीकरण सेवा की जानकारी नहीं मिली है।
कंबोडिया में धर्म
कंबोडिया में मुख्यतः थेरवाद बौद्ध धर्म का पालन किया जाता है; 2019 की जनगणना में 97.1% आबादी ने बौद्ध धर्म को अपना धर्म बताया। मुस्लिम, ईसाई, स्वदेशी और छोटे धार्मिक समुदाय भी आस्था की संवैधानिक स्वतंत्रता के तहत उपासना करते हैं। धार्मिक जीवन आम तौर पर पगोडा, मस्जिदों, गिरजाघरों, सामुदायिक स्थलों और पारिवारिक परंपराओं के इर्द-गिर्द केंद्रित होता है।
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