नाउरू का क्षेत्रफल लगभग 21 km² है। इसमें सँकरा तटीय मैदान, ढाल और व्यापक खनन से बदला चूना-पत्थर तथा फॉस्फेट का पठार है। स्रोत के अनुसार पठार लगभग 65 से 71 मीटर ऊँचा है। स्थानीय शब्द टॉपसाइड और बॉटमसाइड क्रमशः खनन किए पठार और अधिक घनी आबादी वाले तटीय पट्टी का वर्णन करते हैं। बुआडा लैगून मुख्य महत्वपूर्ण अंतर्देशीय जल निकाय है; खारे तालाब और सिंकहोल भी हैं। तटीय आवासों में वनस्पति, ज्वार-भाटा समतल, किनारी प्रवाल-भित्ति, रीफ़ ढाल और अपतटीय खुले पानी का क्षेत्र शामिल है। नाउरू का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) लगभग 320,000 km² है। द्वीप पर लगभग 36 देशी पक्षी प्रजातियाँ और 63 स्वदेशी पौध प्रजातियाँ हैं; मौजूदा संश्लेषण में कोई स्थानिक पौधा नहीं पहचाना गया। नाउरू रीड वार्बलर, जिसे नाउरू कैनरी या Acrocephalus rehsei भी कहते हैं, नाउरू का स्थानिक पक्षी है और हाल में खनन किए क्षेत्रों को छोड़कर द्वीप के बड़े हिस्से में आम है। माइक्रोनेशियाई कबूतरों की आबादी बहुत छोटी है; नॉडी पक्षियों का शिकार उनकी प्रजनन गति से तेज़ हो सकता है। समुद्री जैव-विविधता में 300–500 रे-पंख वाली मछली प्रजातियों का अनुमान है। कठोर प्रवाल की सात प्रजातियाँ दर्ज हैं; Porites rus प्रमुख है और Acropora दुर्लभ है। Pocillopora fungiformis संकटग्रस्त श्रेणी में है और EDGE संरक्षण महत्व रखता है। Tridacna maxima और Tridacna squamosa सहित विशाल क्लैम संरक्षित हैं; Tridacna maxima स्थानीय रूप से फिर मिला है। नाउरू में हरे कछुओं के अंडे देने की रिपोर्ट है। रीफ़ से संग्रह, तट के पास मछली पकड़ना और तालाबों का उपयोग खाद्य सुरक्षा तथा निर्वाह में मदद करता है। अपतटीय टूना मछली पकड़ना EEZ में होता है और जलीय कृषि में मिल्कफ़िश, Chanos chanos शामिल है। तटीय क्षेत्र 1–3 का भारी उपयोग होता है। स्थानीय प्रकृति-मनोरंजन मुख्यतः तट, रीफ़ और बुआडा लैगून के आसपास होता है; औपचारिक पार्क ढाँचा दर्ज नहीं है। सामुदायिक मत्स्य प्रबंधन क्षेत्र स्थानीय प्रबंधन का व्यावहारिक तरीका हो सकते हैं, लेकिन कानूनी रूप से स्थापित संरक्षित क्षेत्र के समान नहीं हैं। संरक्षित और अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपाय डेटाबेस ने 9 मार्च 2026 को नाउरू के लिए 0 km² स्थलीय संरक्षित क्षेत्र, 0 km² समुद्री संरक्षित क्षेत्र और कोई अंतरराष्ट्रीय पदनाम दर्ज नहीं किया। ऐतिहासिक लक्ष्यों में 2025 तक 5% स्थलीय क्षेत्र, लगभग 105 हेक्टेयर, और 22% तटीय जल, लगभग 34,137 हेक्टेयर, संरक्षित करने का प्रस्ताव था; मौजूदा प्रमाण लक्ष्य पूरे होने की पुष्टि नहीं करता। अनिबारे खाड़ी और अन्य स्थान समुदाय-आधारित मानचित्रण में प्रस्तावित या शामिल हुए हैं, पर प्रस्ताव से औपचारिक संरक्षित दर्जा नहीं मिलता। पर्यावरण विभाग, प्रबंधन और कृषि पर्यावरण विषय देखता है। जलवायु परिवर्तन और राष्ट्रीय लचीलापन विभाग जलवायु तथा लचीलापन संभालता है; नाउरू मत्स्य और समुद्री संसाधन प्राधिकरण तटीय तथा समुद्री मत्स्य प्रबंधन करता है; नाउरू पुनर्वास निगम खनन-भूमि पुनर्वास में RONPhos को सहायता देता है। पर्यावरण प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन अधिनियम 2020 एहतियाती दृष्टिकोण अपनाता है और जैव-विविधता, पर्यावरण प्रभाव आकलन, प्रदूषण, कचरा, आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच और लाभ-साझेदारी, सार्वजनिक शिक्षा तथा निगरानी को कवर करता है। बड़े विकास के आकलन में पर्यावरण प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और कचरा प्रबंधन योजनाएँ शामिल हैं। आवेदक आकलन शुरू करता है; जिम्मेदार समिति निर्णय में तीन महीने तक ले सकती है, जिसके बाद 14 दिन की सूचना अवधि है। अधिनियम कम-से-कम हर पाँच वर्ष में पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट की व्यवस्था भी करता है। तटीय मत्स्य और जलीय कृषि अधिनियम 2020 तथा उसके विनियम तटीय पारितंत्र को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाते हैं। प्रवाल, चट्टान या मलबा हटाने के लिए अनुमति चाहिए; तटीय मत्स्य जल में कचरा छोड़ना मना है। समुद्री कछुए और उनके अंडे संरक्षित हैं; विशाल क्लैम हटाना या बेचना मना है और समुद्री खीरे का व्यावसायिक निर्यात निषिद्ध है। मछली पकड़ने के जाल, जाली का आकार, मछली का आकार और कोटा विनियमित हैं। 2026 के विनियम 30 जनवरी 2026 को अधिसूचित हुए और 30 जनवरी 2027 से लागू होने के लिए निर्धारित हैं। निश्चित दंड $100 और सामान्य अधिकतम जुर्माना $5,000 बताया गया है; दंड 14 दिनों में देना होता है। गैर-नाउरू तटीय मत्स्य लाइसेंस शुल्क उपलब्ध प्रमाण से स्थापित नहीं है; पंजीकृत पारंपरिक अधिकारों का सम्मान करना होगा। फॉस्फेट खनन से तलछट का स्थानांतरण, मिट्टी का क्षय तथा रीफ़ उत्पादकता और विविधता में कमी आई है। मलजल, सेप्टिक व्यवस्था और कचरा समुद्र, भूजल तथा बुआडा लैगून को प्रभावित कर सकते हैं। आक्रामक खरपतवार, फल-मक्खियाँ, चूहे और अन्य कीट देशी पारितंत्रों को खतरा देते हैं; अतिमछली पकड़ना और अतिशिकार वन्यजीव आबादी घटाते हैं। 36 महीने तक चलने वाला सूखा मीठे पानी की परत घटा और लवणता बढ़ा सकता है। समुद्र-स्तर वृद्धि, अत्यधिक समुद्री स्तर, तटीय बाढ़, खारे पानी का प्रवेश, समुद्री गर्म लहरें, प्रवाल विरंजन और महासागर अम्लीकरण अतिरिक्त दबाव डालते हैं। 2003 में बड़ा प्रवाल-विरंजन और बड़े पैमाने पर मछलियों की मृत्यु दर्ज हुई। 2014 तक स्रोतों में उष्णकटिबंधीय चक्रवात दर्ज नहीं थे, हालांकि तेज़ हवाएँ और समुद्री बौछारें आती हैं। नाउरू पुनर्वास निगम का RONPhos के साथ काम क्षतिग्रस्त खनन-पठार भूमि की व्यावहारिक बहाली है, लेकिन अक्षत अंतर्देशीय पारितंत्र की पुनर्स्थापना का सीधा समकक्ष नहीं। ऊँची भूमि पर पुनर्विकास का जलवायु लचीलेपन और बस्ती-योजना पर भी असर पड़ता है। BIORAP 2015 ने समुदाय के सदस्यों और सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया; DEMA, DCCNR और NRG ने 2024 में जैव-विविधता स्कूल आयोजन किया। पर्यावरण निर्णयों और सामुदायिक प्रबंधन के लिए रीफ़, प्रजाति, भूजल, आक्रामक प्रजाति और कचरे की निरंतर निगरानी चाहिए।
नाउरू में प्रकृति
नाउरू की प्रकृति में उठा हुआ प्रवाल द्वीप, तटीय मैदान, किनारी प्रवाल-भित्ति, बुआडा लैगून, खनन किया गया फॉस्फेट पठार और आसपास का महासागर शामिल हैं। यहाँ के आवास स्थानिक नाउरू रीड वार्बलर, देशी पक्षियों और पौधों, रीफ़ मछलियों, प्रवालों, विशाल क्लैम और अंडे देने आने वाले हरे कछुओं का सहारा हैं। 9 मार्च 2026 तक औपचारिक स्थलीय या समुद्री संरक्षित क्षेत्र दर्ज नहीं हैं। खनन की विरासत, प्रदूषण, जल-संकट, अतिदोहन और जलवायु परिवर्तन भूमि, मीठे पानी तथा समुद्री पारितंत्रों पर दबाव डालते हैं।
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