मॉरिटानिया का प्रारंभिक इतिहास सहारा में बड़े पर्यावरणीय बदलावों को दर्शाता है। अधिक नम अवधियों में समुदाय बसे, खेती की और उन क्षेत्रों से होकर आते-जाते रहे जो बाद में शुष्क हो गए। एल बेय्यद में लगभग 700,000 से 100,000 ईसा पूर्व के निम्न पुरापाषाण काल के साक्ष्य हैं। अगुइयित, एल घल्लाउइया, अमोग्जार और तिन्चमार्त जैसे स्थलों पर शैलचित्र और सहारा-पार आवाजाही से जुड़े साक्ष्य मिलते हैं। धर तिचित-ओआलाता-नेमा क्षेत्र में दीर्घकालीन बसावट और कृषि-विकास के प्रमाण हैं, जो अधिक जटिल समाजों से पहले के हैं। प्राचीन काल से आरंभिक मध्ययुग तक, लमतूना, गदाला और मसूफा सहित संहाजा समूहों ने अद्रार और तगांत को व्यापक सहाराई तथा साहेल नेटवर्क से जोड़ा। इजिल और आवलिल का नमक, सोना, पशुधन और निर्मित वस्तुएँ तेगदाउस्त से होकर आती-जाती थीं, जिसे अवदागुस्त भी कहा जाता है। वागादू, जिसे अक्सर घाना सत्ता-क्षेत्र से जोड़ा जाता है, लगभग चौथी शताब्दी से व्यापक क्षेत्र में सोनिंके नेटवर्क के माध्यम से विकसित हुआ। संहाजा समूहों के साथ उसका संबंध जटिल था। यह दावा कि लगभग 1076 में अल्मोराविद विजय ने घाना को नष्ट कर दिया था, विवादित है और इसे स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए। लगभग आठवीं शताब्दी से इस्लामीकरण एक लंबी प्रक्रिया के रूप में विकसित हुआ। ग्यारहवीं और बारहवीं शताब्दियों में अल्मोराविद आंदोलन सहारा पार करके मग़रिब और अल-अंदलुस तक फैला। औआदाने, शिंगेट्टी, तिशित्त और ओआलाता जैसे मध्ययुगीन नगर कारवाँ, तीर्थयात्रा और शिक्षा मार्गों के साथ विकसित हुए। उनके कसूर ऐतिहासिक किलेबंद बस्तियाँ थे; मस्जिदों, महाद्राओं, मकबरों और पांडुलिपि पुस्तकालयों ने धार्मिक अध्ययन और विद्वत्ता को सहारा दिया। शिंगेट्टी इस्लामी शिक्षा का क्षेत्रीय केंद्र बना, जहाँ कानून, धर्मशास्त्र, भाषा और प्राकृतिक विज्ञानों पर पांडुलिपियाँ थीं। मध्ययुगीन प्रभाव-क्षेत्र उन इलाकों से होकर गुजरते थे जो आधुनिक राष्ट्रीय सीमाओं से मेल नहीं खाते। पंद्रहवीं शताब्दी से यूरोपीय तटीय व्यापार ने अटलांटिक तट को व्यापक वाणिज्यिक प्रणालियों से जोड़ा। पुर्तगाल और स्पेन इस क्षेत्र में सक्रिय थे और 1638 से डच व्यापारी गोंद-अरबी के व्यापार में शामिल हुए। त्रार्ज़ा और ब्राकना सेनेगल नदी तथा अटलांटिक अर्थव्यवस्थाओं से जुड़े थे। सोलहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से संहाजा, अरब और साहेल संबंधों के साथ अमीरात और कबायली सत्ता-संरचनाएँ विकसित हुईं। हसनिया अरबी संचार की प्रमुख भाषा बनी। बाद में व्यापार मार्गों के बदलने से कई कारवाँ नगरों का महत्व घटा। सामाजिक पदानुक्रम, दासता और निर्भरता की प्रणालियाँ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विषय हैं; अतीत की संरचनाओं, बाद के उन्मूलन और वर्तमान परिणामों के बीच सावधानी से अंतर करना आवश्यक है। 1900 के दशक में फ्रांसीसी विस्तार इस क्षेत्र तक पहुँचा। फ्रांस ने 1920 में मॉरिटानिया को अफ्रीक-ऑक्सिडांताल-फ्राँसेज़ के भीतर एक उपनिवेश बनाया और 1946 में इसे समुद्रपार क्षेत्र का दर्जा दिया। औपनिवेशिक प्रशासन में मग़रिब और फ्रांसीसी पश्चिम अफ्रीका को जोड़ने जैसे रणनीतिक उद्देश्य तथा व्यापार और भूभाग पर नियंत्रण शामिल थे। मॉरिटानिया ने 28 नवंबर 1958 को स्वायत्तता प्राप्त की, 22 मार्च 1959 को संविधान अपनाया और 28 नवंबर 1960 को स्वतंत्र हुआ। नुआकशोत को नई राजधानी के रूप में विकसित किया गया। राज्य-निर्माण में घुमंतू, कसूर, नदी-घाटी और तटीय क्षेत्रों को जोड़ा गया, पर आधुनिक नाम मॉरिटानिया को प्राचीन रोमन प्रांत मॉरेटानिया के साथ निरंतरता का प्रमाण नहीं समझना चाहिए। स्वतंत्रता के बाद मुख्तार औल्द दाद्दा ने 1960 से 1978 तक एक-दलीय व्यवस्था का नेतृत्व किया। 14 नवंबर 1975 की मैड्रिड घोषणा के बाद मॉरिटानिया पश्चिमी सहारा संघर्ष में शामिल हुआ और 1979 में पीछे हट गया; संघर्ष की वैधता और व्याख्या विवादित हैं। 10 जुलाई 1978 के तख्तापलट के बाद सैन्य शासन आया और 1979 तथा 1980 में सत्ता में और बदलाव हुए। मआउया औल्द सिद’अहमद ताया ने 1984 से 2005 तक शासन किया। 1991 के संविधान ने बहुदलीय राजनीति के लिए औपचारिक ढाँचा दिया, जबकि कार्यपालिका और सेना की निरंतरता महत्वपूर्ण रही। 1989–1991 के सेनेगल-मॉरिटानिया संघर्ष में निष्कासन, वापसी और अरब-अफ्रीकी पहचान से जुड़े विवाद शामिल थे। 2005 और 2008 के तख्तापलट के बाद संक्रमण हुए और 2007 तथा 2009 में डकार समझौता तथा चुनाव हुए। 2019 में पहली बार दो निर्वाचित राष्ट्रपतियों के बीच सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण हुआ। मोहम्मद औल्द ग़ज़वानी 29 जून 2024 को 56.12 प्रतिशत मतों के साथ फिर निर्वाचित हुए। मॉरिटानिया के इतिहास पर शोध में राष्ट्रीय पुस्तकालय, पांडुलिपि पुस्तकालय, पारिवारिक संग्रह, पुरातात्विक परियोजनाएँ, विरासत संस्थाएँ, नुआकशोत विश्वविद्यालय, राज्य अभिलेखागार, औपनिवेशिक अभिलेख, यूनेस्को और इकोमोस दस्तावेज़ तथा मौखिक-इतिहास साक्षात्कार उपयोगी हैं। संस्कृति, कला, संचार और संसद-संबंध मंत्रालय, विरासत के क्षेत्र में मॉरिटानियाई अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, राष्ट्रीय संग्रहालय और सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय परिषद महत्वपूर्ण संस्थागत संदर्भ हैं। संग्रह के अनुसार पहुँच अलग-अलग है: राष्ट्रीय पुस्तकालय सामान्य पठन, शोधकर्ता और पांडुलिपि सेवाएँ देता है, जबकि दुर्लभ पांडुलिपियाँ निजी या पारिवारिक अभिरक्षा में रह सकती हैं और उनके लिए मामले-दर-मामले अनुमति चाहिए। 14 मई 2019 का कानून 2019-024, कानून 2005-046 का स्थान लेकर शोध सामग्री में पहचाना गया वर्तमान विरासत-कानून ढाँचा प्रदान करता है। इसमें ऐतिहासिक, पुरातात्विक और प्रागैतिहासिक वस्तुएँ, स्थल, पांडुलिपियाँ और अभिलेख शामिल हैं। पुरातात्विक कार्य, खुदाई, निर्यात और संरक्षित स्थलों में भौतिक बदलाव के लिए अनुमति आवश्यक हो सकती है। विरासत सामग्री को बिना अनुमति हटाने, नष्ट करने या निर्यात करने से कानूनी और व्यावहारिक जोखिम पैदा होते हैं। देशभर में इतिहास के लिए कोई एक शुल्क या मानक प्रसंस्करण अवधि नहीं है; शोध में यात्रा, प्रतिलिपि, डिजिटलीकरण, अनुमति और परियोजना की लागत लग सकती है। स्रोतों की आलोचनात्मक जाँच में उत्पत्ति, तिथि, भाषा, स्वामित्व और राजनीतिक संदर्भ की तुलना करें—विशेषकर जहाँ प्रारंभिक इतिहास, घाना और अल्मोराविद व्याख्याएँ, औपनिवेशिक अभिलेख, आधुनिक सीमाएँ, पश्चिमी सहारा और पहचान-संबंधी स्मृतियाँ विवादित हों।
मॉरिटानिया में इतिहास
मॉरिटानिया का इतिहास पाषाण युग से वर्तमान तक बदलते समाजों, पर्यावरण, व्यापार नेटवर्क, राज्यों और स्मृतियों का इतिहास है। इसके प्रमुख साक्ष्यों में पुरातात्विक स्थल, प्राचीन बस्तियाँ, कसूर, पांडुलिपियाँ, औपनिवेशिक अभिलेख और मौखिक इतिहास शामिल हैं। देश के अतीत में सहारा-पार व्यापार, इस्लामीकरण, अल्मोराविद काल, फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासन, 1960 की स्वतंत्रता, सैन्य शासन, पश्चिमी सहारा संघर्ष और सेनेगल-मॉरिटानिया संघर्ष शामिल हैं।
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