सूडान का चुनावी ढाँचा मुख्यतः राष्ट्रीय चुनाव अधिनियम 2008 और बाद के संशोधनों पर आधारित है, हालाँकि कुछ प्रावधानों और 2018 के संशोधन को कानूनी चुनौती दी गई है। 2019 के संवैधानिक चार्टर ने 2005 के अंतरिम संविधान की जगह ली और 39 महीने बाद चुनावों की ओर बढ़ने की संक्रमण योजना बनाई। इसमें मंत्रिमंडल से परामर्श के बाद संप्रभुता परिषद द्वारा नियुक्त नया चुनाव आयोग भी परिकल्पित था। अक्टूबर 2021 के तख्तापलट से पहले तैयार चुनाव आयोग कानून का मसौदा लागू नहीं हुआ। न्याय मंत्रालय द्वारा 23 फरवरी 2025 को प्रकाशित संवैधानिक संशोधन लागू हुए, लेकिन वर्तमान चुनाव नियम और समय-सारणी भरोसेमंद रूप से सत्यापित नहीं हैं। राष्ट्रीय चुनाव आयोग (NEC) ऐतिहासिक रूप से 18 राज्यों में संरचनाओं के माध्यम से मतदाता पंजीकरण, चुनाव और जनमत-संग्रह आयोजित करता था। उसका वर्तमान पुनर्गठन, स्वतंत्रता और संचालन क्षमता भरोसेमंद रूप से पुष्ट नहीं है। मौजूदा मतदाता सूची, मतदान समय-सारणी, उम्मीदवार पंजीकरण अवधि, पर्यवेक्षक मान्यता प्रक्रिया, चुनाव बजट या देशव्यापी सुरक्षा योजना सत्यापित नहीं हुई है। जारी युद्ध ने राजनीतिक संस्थाओं को बाधित किया है, लोगों को विस्थापित किया है और राज्य के कार्यों को विभाजित किया है; इसलिए ऐतिहासिक प्रक्रियाओं को मतदान के लिए मौजूदा आधार न मानें। ऐतिहासिक नियमों के तहत, 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का मानसिक रूप से सक्षम सूडानी नागरिक पंजीकरण करा सकता था। पंजीकरण बंद होने से पहले आम तौर पर निर्वाचन क्षेत्र में कम-से-कम तीन महीने का निवास और पहचान, पात्रता तथा निवास के दस्तावेज़ आवश्यक थे। दस्तावेज़ न होने पर कभी-कभी गवाह, पारंपरिक प्राधिकरण या स्थानीय प्रशासनिक ढाँचा पुष्टि दे सकते थे। सैन्य कर्मियों और घुमंतू लोगों को तीन महीने के निवास की शर्त से छूट थी, लेकिन लागू विशेष प्रक्रियाएँ अस्पष्ट थीं। विदेश में पंजीकरण भौगोलिक निर्वाचन वाले चुनावों या जनमत-संग्रह तक सीमित था और पासपोर्ट तथा वैध निवास की शर्तों के कारण शरणार्थियों के लिए पहुँच कठिन थी। आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की स्थिति स्पष्ट रूप से तय नहीं थी। ऐतिहासिक रूप से NEC चुनाव या जनमत-संग्रह से लगभग तीन महीने पहले सूची की जाँच करता था। अस्थायी सूचियाँ सार्वजनिक होती थीं और व्यक्ति सात दिनों के भीतर लिखित आपत्ति दे सकता था। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की न्यायाधीश-नेतृत्व वाली समिति से पाँच दिनों के भीतर निर्णय की अपेक्षा थी। कोई व्यक्ति केवल एक भौगोलिक निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत हो सकता था। निर्वाचन क्षेत्र की सीमाएँ जनगणना आँकड़ों से जुड़ी थीं, राज्य सीमाएँ पार नहीं कर सकती थीं और जनसंख्या का अंतर 15 प्रतिशत से अधिक न रखने का लक्ष्य था। पहले की सीमाओं के लिए इस्तेमाल 2008 की जनगणना संघर्ष और विस्थापित आबादी के अधूरे आँकड़ों के कारण विवादित थी; मौजूदा सीमा निर्धारण सत्यापित नहीं है। 13–16 अप्रैल 2015 का चुनाव पूर्व राष्ट्रीय प्रणाली का उदाहरण है। राष्ट्रपति सीधे चुना जाता था; किसी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट न मिलने पर दो अग्रणी उम्मीदवारों के बीच दूसरा दौर होता था। राष्ट्रीय सभा की सीटों में समानांतर मॉडल था: 50 प्रतिशत प्रथम-पास-द-पोस्ट निर्वाचन क्षेत्र, महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत बंद आनुपातिक-प्रतिनिधित्व सूचियाँ और दलों की बंद आनुपातिक-प्रतिनिधित्व सूचियों के लिए 20 प्रतिशत। चुनाव बहिष्कार और सीमित राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच हुआ था, इसलिए औपचारिक व्यवस्था व्यापक व्यावहारिक विकल्प की गारंटी नहीं देती थी। ऐतिहासिक राष्ट्रपति उम्मीदवारों का जन्म से सूडानी नागरिक, कम-से-कम 40 वर्ष का, साक्षर, मानसिक रूप से सक्षम और संबंधित दोषसिद्धियों से मुक्त होना आवश्यक था। उम्मीदवार को 18 राज्यों में से कम-से-कम दो-तिहाई राज्यों में 15,000 पंजीकृत मतदाताओं का समर्थन चाहिए था, जिसमें हर भाग लेने वाले राज्य में कम-से-कम 200 समर्थक हों। ऐतिहासिक जमा राशि 10,000 SDG थी और उम्मीदवार को 10 प्रतिशत से अधिक वोट मिलने या 45 दिनों के भीतर नाम वापस लेने पर लौटाई जाती थी। मौजूदा नामांकन शुल्क, समय-सीमा और पहुँच की शर्तें ज्ञात नहीं हैं। ऐतिहासिक चुनाव प्रचार नियम विदेशी राज्यों और संगठनों से वित्तीय सहायता पर रोक लगाते थे; घरेलू निजी चंदे की अनुमति थी, लेकिन गुमनाम चंदा नहीं। दलों और उम्मीदवारों को अंतिम नतीजे के 30 दिनों के भीतर वित्तपोषण के स्रोत और खर्च बताने होते थे और वे लेखा-परीक्षा के अधीन थे। कानूनी ढाँचे में सार्वजनिक मीडिया तक समान निःशुल्क पहुँच दी गई थी और सरकारी वित्तपोषण संभव था, हालाँकि वितरण नियम स्पष्ट नहीं थे। 2015 का चुनाव पूरी तरह राज्य-वित्तपोषित था और NEC का बजट 800 मिलियन SDG बताया गया था; यह आँकड़ा वर्तमान लागत या बजट स्थापित नहीं करता। ऐतिहासिक रूप से मतदान गुप्त था। राज्य उच्च समितियाँ, रिटर्निंग अधिकारी और निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव अधिकारी पंजीकरण, मतदान, छँटाई और मतगणना देखते थे। चुनाव, पंजीकरण, उम्मीदवारी और सीमाओं पर कानूनी शिकायत संभव थी, लेकिन राष्ट्रीय चुनाव अधिनियम में अलग विवाद-निपटान अध्याय नहीं था। शिकायत का अधिकार सीधे प्रभावित पक्षों तक सीमित था; सक्षम निकाय और अपील की समय-सीमाएँ अस्पष्ट थीं और ऐतिहासिक शिकायतें कभी-कभी अभियोजकों या अदालतों तक गईं। राजनीतिक भागीदारी, गोपनीयता और दबाव से मुक्ति के कानूनी संरक्षण प्रासंगिक बने हुए हैं, लेकिन युद्ध उनकी व्यावहारिक उपलब्धता को गंभीर रूप से सीमित करता है।
सूडान में चुनाव
सूडान में राष्ट्रीय चुनावों के लिए औपचारिक कानूनी ढाँचा है, लेकिन इस समय देशव्यापी चुनाव प्रक्रिया, चुनाव तारीख, मतदाता पंजीकरण अवधि या उम्मीदवार पंजीकरण अवधि का भरोसेमंद दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है। पिछला देशव्यापी मतदान 13 से 16 अप्रैल 2015 तक हुआ था और उसमें राष्ट्रपति तथा राष्ट्रीय सभा के चुनाव शामिल थे। अप्रैल 2023 से जारी युद्ध, विस्थापन और बिखरे हुए राज्य कार्यों के कारण मौजूदा चुनावी पहुँच और चुनाव निकायों का संचालन अनिश्चित है।
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